पांच साल पुराने हत्या केस में आया बड़ा फैसला, अजय जायसवाल और सुभद्रा देवी को उम्रकैद; हजारों का लगा जुर्माना

गोरखपुर में पांच साल पुराने हत्या के मामले में अदालत ने अजय जायसवाल और सुभद्रा देवी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। व

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 16 October 2026, 8:57 PM IST

Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पांच साल पुराने हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने अजय जायसवाल और सुभद्रा देवी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वर्ष 2021 में दर्ज इस मामले में फैसला पुलिस की प्रभावी पैरवी और न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया है।

2021 के हत्या मामले में अदालत का फैसला

यह मामला गोरखपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में वर्ष 2021 में दर्ज हत्या के मुकदमे से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में मुकदमा अपराध संख्या 263/2021 के तहत केस दर्ज किया गया था। मुकदमे में भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और 323/34 के तहत आरोप लगाए गए थे। अजय जायसवाल पुत्र मधुसूदन जायसवाल और सुभद्रा देवी पत्नी मधुसूदन जायसवाल को इस मामले में अभियुक्त बनाया गया था। दोनों गोरखपुर के थाना कोतवाली क्षेत्र स्थित मकान नंबर 12, गंगेज चौक के निवासी बताए गए हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर विचार किया गया। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

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दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना

अदालत ने अजय जायसवाल और सुभद्रा देवी को आजीवन कारावास के साथ 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस तरह दोनों को जेल की सजा के अलावा आर्थिक दंड भी भुगतना होगा। पांच साल पुराने इस मामले में आए फैसले को गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और अभियोजन की भूमिका के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

ऑपरेशन कनविक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी

उत्तर प्रदेश पुलिस अपराधियों को अदालत से सजा दिलाने के उद्देश्य से ऑपरेशन कनविक्शन अभियान चला रही है। इस अभियान का मकसद गंभीर आपराधिक मामलों में जांच, साक्ष्य और न्यायालय में प्रभावी पैरवी के जरिए दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना है।

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सरकारी अधिवक्ताओं की भी रही अहम भूमिका

इस मामले में दोषसिद्धि और सजा दिलाने की प्रक्रिया में जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) प्रियानंद सिंह और अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) जयनाथ यादव का भी योगदान रहा। पुलिस के अनुसार, मामले में प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

Location :  Gorakhpur

Published :  16 October 2026, 8:57 PM IST