पिता ने सिर्फ ‘ना’ कहा… कुछ ही मिनटों बाद 7 साल के बेटे ने उठाया गड़ासा, फिर जो हुआ उसने सभी को दहला दिया

गोंडा के बेसियाचैन गांव में जम्मू जाने से मना करने पर सात वर्षीय बेटे ने अपने दिव्यांग पिता पर गड़ासे से हमला कर दिया। घायल पिता का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। विशेषज्ञों ने बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति पर सतर्क रहने की सलाह दी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 27 July 2026, 2:24 PM IST

Gonda: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। देहात कोतवाली क्षेत्र के बेसियाचैन गांव में जम्मू जाने से मना करने पर महज सात साल के बेटे ने अपने दिव्यांग पिता पर गड़ासे से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल पिता को परिजन तत्काल मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है।

खेत में आराम कर रहे पिता पर किया हमला

जानकारी के अनुसार, रविवार दोपहर पिता खेत में आम के पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे। इसी दौरान सात वर्षीय बेटा घर से गड़ासा लेकर पहुंचा और उन पर लगातार कई वार कर दिए। पिता की चीख-पुकार सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बच्चे के हाथ से गड़ासा छीनकर हमला रुकवाया। इसके बाद घायल को अस्पताल पहुंचाया गया।

जिद पूरी न होने पर उठाया खौफनाक कदम

परिजनों ने बताया कि बच्चे के चाचा-चाची जम्मू में मजदूरी करते हैं। बच्चा भी उनके साथ जम्मू जाने की जिद कर रहा था, लेकिन पिता ने उसे मना कर दिया और डांट दिया। इसी बात से नाराज होकर उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

‘अंतिम सांसों तक रही बलरामपुर की फिक्र’; जानिए कैसे जनसेवा की मिसाल बने रहे पूर्व मंत्री हनुमंत सिंह

चार साल पहले मां छोड़कर चली गई थी

परिवार के अनुसार, चार वर्ष पहले बच्चे की मां दोनों बेटों को छोड़कर चली गई थी। तब से पिता ही दोनों बच्चों की देखभाल कर रहे थे। उन्होंने मां और पिता दोनों की जिम्मेदारी निभाई, लेकिन किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक छोटी-सी जिद इतनी बड़ी घटना में बदल जाएगी।

संत प्रेमानंद से मिलने की जिद: नेपाल बॉर्डर पार कर वृंदावन पहुँचे मासूम भाई-बहन, फुटपाथ पर गुजारी रात

विशेषज्ञों ने दी अभिभावकों को सलाह

मेडिकल कॉलेज की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नूपुर पाल के अनुसार, बच्चों के व्यवहार, गुस्से और भावनात्मक बदलावों पर अभिभावकों को लगातार नजर रखनी चाहिए। हिंसक ऑनलाइन कंटेंट, मोबाइल गेम्स और घर का माहौल बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। समय रहते संवाद और काउंसलिंग कई गंभीर घटनाओं को रोक सकती है।

Location :  Gonda

Published :  27 July 2026, 2:24 PM IST