Gorakhpur News: IAS का रौब, फर्जी दस्तावेज और लाखों की ठगी… आखिर कैसे चलता था यह खेल?

गोरखपुर पुलिस ने फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर लोगों को ठेका, जमीन और प्रशासनिक लाभ दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। गिरोह के सरगना समेत चार आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब उनकी संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 7 June 2026, 12:26 AM IST

Gorakhpur: गोरखपुर में खुद को बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बताकर लोगों को ठेका दिलाने, जमीन उपलब्ध कराने और सरकारी प्रभाव का फायदा पहुंचाने का झांसा देने वाले एक संगठित गिरोह पर पुलिस ने बड़ा शिकंजा कसा है। लंबे समय से लोगों को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले इस गिरोह के खिलाफ अब गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। थाना गुलरिहा पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत चार आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर लोगों का भरोसा जीतते थे और फिर कूटरचित दस्तावेजों के सहारे उन्हें ठगी का शिकार बनाते थे।

संगठित अपराध के खिलाफ अभियान में बड़ी कार्रवाई

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जिले में संगठित अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक नगर के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी गोरखनाथ के पर्यवेक्षण में इस मामले की गहन जांच की गई। जांच के दौरान ऐसे कई तथ्य सामने आए, जिनसे स्पष्ट हुआ कि यह कोई अकेला व्यक्ति नहीं बल्कि एक संगठित गिरोह था, जो योजनाबद्ध तरीके से लोगों को ठग रहा था।

खुद को बताता था IAS अधिकारी

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला ललित किशोर है। आरोप है कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर खुद को आईएएस अधिकारी "गौरव कुमार सिंह" बताता था। लोगों को विश्वास दिलाने के लिए आरोपी नकली पहचान पत्र, फर्जी दस्तावेज, व्हाट्सएप चैट और कूटरचित पत्राचार का इस्तेमाल करते थे। बताया जा रहा है कि आरोपी इतने शातिर थे कि पहली नजर में उनके दस्तावेज और बातचीत असली प्रतीत होती थी। इसी का फायदा उठाकर वे लोगों का भरोसा जीत लेते थे।

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ठेका और जमीन दिलाने के नाम पर वसूली

पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य सरकारी विभागों में ठेका दिलाने, विवादित या सरकारी जमीन उपलब्ध कराने और प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव का इस्तेमाल कर काम कराने का दावा करते थे। इसके बदले लोगों से मोटी रकम वसूली जाती थी। जिन लोगों को झांसे में लिया जाता था, उनसे अलग-अलग माध्यमों से पैसे लिए जाते थे। कई मामलों में पीड़ितों को लंबे समय तक भरोसे में रखकर लगातार रकम वसूली गई।

बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था पैसा

जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी से हासिल धनराशि को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था, ताकि पैसों के स्रोत और लेनदेन को छिपाया जा सके। पुलिस अब इन बैंक खातों की भी पड़ताल कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया।

लोगों में बना रखा था प्रभाव और भय

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी खुद को प्रभावशाली अधिकारी बताकर लोगों के बीच अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करते थे। कई लोग उनके पद और प्रभाव के दावों से प्रभावित होकर उनके संपर्क में आ जाते थे। यही वजह थी कि गिरोह लंबे समय तक अपनी गतिविधियां संचालित करने में सफल रहा।

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पहले से भी दर्ज हैं कई मुकदमे

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपियों के खिलाफ पहले से भी धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े मुकदमे दर्ज हैं। यही वजह है कि पुलिस ने उन्हें संगठित अपराधी मानते हुए गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की है।

संपत्तियों की भी होगी जांच

पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि गिरोह की आर्थिक गतिविधियों और चल-अचल संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी गई है। यदि जांच में अवैध रूप से अर्जित संपत्ति मिलने के प्रमाण सामने आते हैं तो आरोपियों की संपत्ति जब्त करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

Location :  Gorakhpur

Published :  7 June 2026, 12:26 AM IST