
4 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला (Image Source: Pinterest)
Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले के जराईकेला थाना क्षेत्र में डायन-बिसाही के आरोप में महिला की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम, पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा की अदालत ने आरोपी कानु बोदरा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा दी है।
मामला जराईकेला थाना कांड संख्या 01/2022 से जुड़ा है। 3 जनवरी 2022 को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 और डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।इस मामले में नयागांव निवासी कानु बोदरा, पिता स्वर्गीय लादु बोदरा को आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि उसने नयागांव करवां टोला निवासी दियु बोदरा, पति स्वर्गीय डिबरू बोदरा की हत्या की थी।
मामले की जांच के दौरान चाईबासा पुलिस ने आरोपी कानु बोदरा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल और अन्य जरूरी पहलुओं से जुड़े साक्ष्य जुटाए और न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत में मामले की सुनवाई पूरी हुई।
सत्रवाद संख्या 250/2022 के तहत मामले की सुनवाई हुई। 17 जून 2026 को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम विनोद कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी कानु बोदरा को दोषी करार दिया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आरोपी को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाओं के नाम पर होने वाले अपराध लंबे समय से सामाजिक चिंता का विषय रहे हैं। कई मामलों में महिलाओं को अंधविश्वास और अफवाहों के कारण हिंसा का सामना करना पड़ता है।
सामाजिक विशेषज्ञों के अनुसार, डायन-बिसाही से जुड़े अपराध केवल आपराधिक घटना नहीं बल्कि सामाजिक मानसिकता और जागरूकता से जुड़ी समस्या भी हैं। ग्रामीण इलाकों में बीमारी, पारिवारिक विवाद या व्यक्तिगत दुश्मनी को कई बार अंधविश्वास से जोड़ दिया जाता है, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान कमजोर वर्गों और महिलाओं को उठाना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ गांव स्तर पर जागरूकता अभियान और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
Location : Chaibasa
Published : 17 June 2026, 6:05 PM IST