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वायरल वीडियो में क्या किया गया दावा? (AI Image)
Arunachal Pradesh: अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों पर चीन के कब्जे और सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान नहीं मिलने का दावा करने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भारतीय सेना ने इस वीडियो को भ्रामक बताते हुए इसकी सच्चाई सामने रखी है। सेना के मुताबिक, वीडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से आवाज और होंठों की गतिविधियों में बदलाव किया गया है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में दावा किया गया है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के असाफिला, लोंगजू और ताक्सिंग सर्कल के कुछ इलाकों पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि इन क्षेत्रों में तैनात भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
वीडियो को इस तरह प्रस्तुत किया गया है, मानो भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन परिस्थितियों को स्वीकार किया हो। हालांकि, सेना ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अधिकारी के नाम से जोड़े गए बयान मनगढ़ंत हैं और वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है।
भारतीय सेना के आधिकारिक फैक्ट-चेकिंग हैंडल 'इंडियन आर्मी फैक्ट चेक' ने वायरल क्लिप को लेकर चेतावनी जारी की। सेना के अनुसार, वीडियो में वास्तविक फुटेज के साथ AI से तैयार की गई आवाज और लिप-सिंकिंग का इस्तेमाल किया गया है। वॉयस क्लोनिंग के जरिए ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि संबंधित अधिकारी ने वास्तव में ये बयान दिए हैं।
इस तरह की तकनीक से तैयार वीडियो देखने में असली लग सकते हैं। इसलिए बिना आधिकारिक पुष्टि के ऐसे वीडियो को सच मानना या आगे साझा करना भ्रामक जानकारी को बढ़ावा दे सकता है।
AI की मदद से तैयार किया गया फर्जी वीडियो ( Img: AI)
सेना के मुताबिक, वायरल क्लिप में इस्तेमाल किया गया मूल फुटेज 27 अक्टूबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग का है। उस समय गिरीश कालिया मेजर जनरल के पद पर थे और 28 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में तैनात थे।
यह प्रेस ब्रीफिंग नियंत्रण रेखा (LoC) के पास आतंकवाद-रोधी अभियानों और घुसपैठ की कोशिशों से संबंधित थी। इसमें घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने, आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई और हथियारों समेत अन्य सामग्री की बरामदगी से जुड़ी जानकारी दी गई थी।
सेना ने स्पष्ट किया कि मूल प्रेस ब्रीफिंग में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों पर कब्जे या भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान नहीं मिलने जैसी कोई बात नहीं कही गई थी। वायरल वीडियो में पुराने फुटेज के साथ AI से तैयार की गई सामग्री जोड़कर गलत संदेश देने की कोशिश की गई है।
यह मामला दिखाता है कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके किसी अधिकारी के नाम से फर्जी बयान फैलाए जा सकते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा से जुड़े संवेदनशील दावों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करना जरूरी है। सोशल मीडिया पर वायरल होने भर से कोई वीडियो या दावा सही साबित नहीं होता।
Location : New Delhi
Published : 27 October 2026, 9:59 AM IST