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Aligarh: अलीगढ़ के महुआखेड़ा थाना क्षेत्र से भ्रूण लिंग परीक्षण और गर्भपात से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक आशा कार्यकर्ता और महिला डॉक्टर ने चार महीने की गर्भवती महिला के गर्भ में लड़की होने की बात कही और इसके बाद उसे ऐसी दवा दी गई, जिससे उसका गर्भपात हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई, जब परिजनों के मुताबिक गर्भ गिरने के बाद भ्रूण देखने पर पता चला कि गर्भ में लड़की नहीं बल्कि लड़का था।
मामले की शिकायत महिला के पति ने पुलिस से की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आशा कार्यकर्ता कमलेश शर्मा और डॉ. सविता सिंघल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, पुलिस ने बृहस्पतिवार को आशा कार्यकर्ता कमलेश शर्मा को कथित तौर पर गर्भपात की चार गोलियों के साथ गिरफ्तार किया है। स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल की जांच की तैयारी शुरू कर दी है।
हाथरस जिले के सासनी थाना क्षेत्र के गांव निनामई निवासी मनोज कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उसकी पत्नी गर्भवती थी। इसी दौरान धनीपुर मंडी निवासी आशा कार्यकर्ता कमलेश शर्मा उनके संपर्क में आई। मनोज का आरोप है कि कमलेश ने दावा किया कि वह गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच करवा सकती है। इसके बाद 26 अगस्त 2026 को वह उसकी पत्नी को रामघाट रोड स्थित केसी सिंघल हॉस्पिटल लेकर गई।
मनोज का आरोप है कि गर्भ में लड़की होने की जानकारी मिलने के बाद आशा कार्यकर्ता ने उस पर प्रभाव डालते हुए एक दवा खाने के लिए दी। परिवार को कथित तौर पर बताया गया कि इस दवा के सेवन से गर्भ गिर जाएगा। इसके बाद महिला ने दवा का सेवन किया। लेकिन कुछ दिन बाद उसकी तबीयत अचानक काफी बिगड़ गई। पति के मुताबिक, 2 सितंबर 2026 को दवा खाने के बाद महिला को गंभीर परेशानी हुई और करीब चार महीने का गर्भ गिर गया।
शिकायत मिलने के बाद महुआखेड़ा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आशा कार्यकर्ता कमलेश शर्मा और डॉ. सविता सिंघल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने बृहस्पतिवार को कमलेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से गर्भपात की चार गोलियां भी बरामद की गई हैं। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि महिला का भ्रूण लिंग परीक्षण किस तरह कराया गया, अल्ट्रासाउंड की प्रक्रिया में क्या हुआ और गर्भपात की दवा किस परिस्थिति में दी गई।
क्षेत्राधिकारी सर्वम सिंह ने बताया कि पीड़ित पति की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। अस्पताल के रिकॉर्ड और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है। जांच में अल्ट्रासाउंड से जुड़े रिकॉर्ड, अस्पताल के दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और आरोपों से संबंधित अन्य साक्ष्यों को देखा जा सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम केसी सिंघल हॉस्पिटल में जांच के लिए जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर अस्पताल के खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
केसी सिंघल हॉस्पिटल को लेकर एक पुराना मामला भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 10 साल पहले भी भ्रूण लिंग निर्धारण के आरोप में अस्पताल को सील किया गया था। उस समय तत्कालीन सीएमओ रूपेंद्र गोयल, पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हरियाणा से आई टीम के साथ अस्पताल पर छापा मारा था।
Location : Aligarh
Published : 4 September 2026, 8:49 PM IST