अमेरिका से आई एक रिपोर्ट ने हिलाया ग्लोबल बाजार, धड़ाम हुए सोना-चांदी के भाव; जानिए भारत पर इसका असर

वैश्विक बाजार से एक ऐसी चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसने निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं। एक बेहद महत्वपूर्ण आंकड़े के जारी होते ही कीमती धातुओं में भारी भूचाल आ गया, जिससे कीमतों में बड़ा क्रैश देखा गया है। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी साफ नजर आ रहा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 September 2026, 8:48 AM IST

New Delhi: अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आई ताजा जॉब रिपोर्ट ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में भूचाल ला दिया है। फेडरल रिजर्व की आगामी पॉलिसी बैठक से ठीक पहले जारी हुए इस मजबूत डेटा के कारण ग्लोबल और घरेलू मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कमोडिटी मार्केट में सोना 1.70% और चांदी 2.19% से ज्यादा टूट गई।

भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इसका सीधा असर दिखा, जहां सोना 4500 रुपए से अधिक फिसलकर 1,51,262 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिनभर के निचले स्तर पर आ गया। वहीं, चांदी की चमक फीकी पड़ते हुए इसके दाम 7777 रुपए की भारी गिरावट के साथ 2,34,572 रुपए के लो लेवल पर पहुंच गए।

क्या कहते हैं अमेरिका के नए रोजगार के आंकड़े?

यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में अमेरिका में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 1,62,000 नई नॉन-फॉर्म पेरोल नौकरियां जुड़ी हैं, जबकि बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर बनी हुई है। इस रिपोर्ट ने 15-16 सितंबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले ब्याज दरों में बड़ी कटौती की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है।

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सेक्टरवार बात करें तो हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में सबसे ज्यादा उछाल आया, जहां रेस्टोरेंट और बार में 59,000 नई नौकरियां जुड़ीं। इसके अलावा लोकल गवर्नमेंट एजुकेशन में 42,000, कंस्ट्रक्शन में 22,000, मैन्युफैक्चरिंग में 16,000 और हेल्थकेयर में 13,000 नए रोजगार बढ़े। हालांकि, टेक और इंफॉर्मेशन सेक्टर पर दबाव साफ दिखा और इस क्षेत्र में 23,000 नौकरियां कम हुईं। इसके साथ ही कर्मचारियों की औसत प्रति घंटा कमाई 0.3% बढ़कर 37.75 डॉलर हो गई है।

ग्लोबल एक्सपर्ट्स और जानकारों की राय

गोल्डमैन सैक्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट टिम अर्बानोविज का मानना है कि यह रिपोर्ट काफी मजबूत है। शुरुआती प्रतिक्रिया के बाद निवेशकों को यह समझ आएगा कि लेबर मार्केट का संतुलन अभी भी बरकरार है।

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प्रसिद्ध सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने इसके प्रभावों को विस्तार से समझाया है-

कमोडिटी मार्केट पर असर: मजबूत रोजगार आंकड़ों से डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मजबूत होते हैं। डॉलर के मजबूत होने और ब्याज दरों के ऊंचे रहने की संभावना से सोने-चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ा है, जिससे बुलियन मार्केट में मुनाफावसूली देखने को मिली है। हालांकि, आर्थिक मजबूती से क्रूड ऑयल और इंडस्ट्रियल मेटल्स को निचले स्तरों पर सपोर्ट मिलेगा।

ब्याज दरों का समीकरण: नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी का डेटा ही यह तय करता है कि फेडरल रिजर्व आगे क्या कदम उठाएगा। मजबूत आंकड़ों के कारण अब फेड द्वारा ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट्स की आक्रामक कटौती करने की उम्मीद कम हो गई है।

भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

अमेरिकी जॉब मार्केट के मजबूत रहने से यह साफ हो गया है कि अमेरिका में मंदी का तात्कालिक खतरा टल गया है, जो इक्विटी मार्केट्स के लिए सकारात्मक संकेत है। शुरुआती दौर में भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स-निफ्टी) और वैश्विक बाजारों में थोड़ी नर्वसनेस या वोलैटिलिटी दिख सकती है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में अमेरिकी मांग बनी रहने से भारतीय आईटी और फार्मा एक्सपोर्टर्स को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल, निवेशकों और नीति-निर्माताओं की निगाहें अब अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी महंगाई के आंकड़ों पर टिकी हैं, जो फेडरल रिजर्व के अगले रुख की दिशा तय करेंगे।

Location :  New Delhi

Published :  5 September 2026, 8:48 AM IST