भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 700 अंक गिरा और निफ्टी 25,600 के नीचे। आईटी शेयरों में बिकवाली, वैश्विक संकेतों का असर और डेरिवेटिव डेटा से मिल रहे संकेतों की पूरी जानकारी।

भारतीय शेयर बाजार अपडेट (img source: google)
New Delhi: सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रही। सोमवार को ओपनिंग बेल के साथ ही बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक फिसल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 25,600 के स्तर के नीचे आ गया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की सतर्कता और कमजोर वैश्विक संकेत साफ दिखाई दिए।
गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों में जारी दबाव रहा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अनिश्चितताओं और टेक कंपनियों की भविष्य की ग्रोथ को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण निवेशकों ने आईटी स्टॉक्स में मुनाफावसूली की।
इसका सीधा असर प्रमुख इंडेक्स BSE Sensex और Nifty 50 पर पड़ा। बड़े आईटी शेयरों में गिरावट ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया और ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत से ही दबाव बना रहा।
डेरिवेटिव आंकड़े भी बाजार में सतर्कता की ओर इशारा कर रहे हैं। 26,000 के स्तर पर कॉल ओपन इंटरेस्ट और 25,500 पर पुट ओपन इंटरेस्ट दर्ज किया गया है। वहीं पुट-कॉल रेशियो (PCR) 0.61 पर बना हुआ है।
विश्लेषकों के मुताबिक यह दर्शाता है कि ट्रेडर्स फिलहाल सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव और नीचे की ओर दबाव की संभावना देख रहे हैं। तकनीकी रूप से 25,500 के नीचे फिसलने पर निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है, जबकि 25,800 के ऊपर मजबूती का संकेत मिल सकता है।
भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा। अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जापान और ऑस्ट्रेलिया के बाजार कमजोरी के साथ कारोबार करते नजर आए, जबकि कोरिया में मामूली बढ़त दर्ज की गई। इन मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों के मन में अनिश्चितता बढ़ा दी, जिसका असर घरेलू बाजार की शुरुआत पर साफ दिखा।
हालांकि गिरावट के बीच विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की आंशिक भागीदारी ने बाजार को पूरी तरह टूटने से बचाया। कुछ चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे व्यापक बाजार में स्थिरता का संकेत मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक टेक सेक्टर में स्पष्ट सुधार नहीं दिखता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल संतुलित और सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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विश्लेषकों के अनुसार, अल्पकालिक ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप-लॉस के साथ ट्रेडिंग करनी चाहिए। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट के दौरान गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश एक बेहतर रणनीति हो सकती है। फिलहाल बाजार का रुख कमजोर दिख रहा है, लेकिन वैश्विक संकेतों में सुधार होने पर तेजी की संभावना भी बनी रह सकती है।