Share Market: दबाव में बाजार की सुस्त शुरुआत, लाल निशान में खुला शेयर बाजार; जानें क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में 17 फरवरी को हल्की गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स 200 अंक टूटा और निफ्टी ने 25,600 स्तर पर कारोबार किया। पोस्ट-अर्निंग्स कंसोलिडेशन और रुपये में कमजोरी से बाजार पर दबाव बना।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 17 February 2026, 10:25 AM IST

New Delhi: भारतीय शेयर बाजार में 17 फरवरी को हल्की गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। तिमाही नतीजों के बाद हो रही मुनाफावसूली और कंसोलिडेशन के बीच शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 200 अंकों से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी 25,600 के अहम स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया।

शुरुआती कारोबार में दबाव

Bombay Stock Exchange (BSE) और National Stock Exchange (NSE) दोनों पर बिकवाली का दबाव देखा गया। निवेशक हालिया कॉरपोरेट नतीजों के बाद अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करते दिखे, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा।

सेंसेक्स में शुरुआती गिरावट 200 अंकों से अधिक रही, जबकि निफ्टी ने 25,600 के स्तर को टेस्ट किया। बाजार में यह मूवमेंट संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और नए ट्रिगर का इंतजार कर रहे हैं।

चुनिंदा शेयरों में तेज गिरावट

कमजोरी के बीच कुछ चुनिंदा शेयरों में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। क्वालिटी वॉल्स में करीब 3% की गिरावट देखी गई, जबकि इटरनल के शेयर लगभग 2% टूट गए। मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी हल्का दबाव नजर आया, हालांकि व्यापक बाजार में घबराहट जैसी स्थिति नहीं दिखी। विश्लेषकों के अनुसार, यह गिरावट किसी बड़े नकारात्मक संकेत की बजाय पोस्ट-अर्निंग्स कंसोलिडेशन का हिस्सा हो सकती है। कई शेयरों में हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक मानी जा रही है।

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रुपये में भी हल्की कमजोरी

शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी दबाव दिखा। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.69 पर पहुंच गया, जो पिछले बंद 90.65 के मुकाबले कमजोर स्तर है। रुपये में यह गिरावट सीमित रही, लेकिन डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेश प्रवाह में उतार-चढ़ाव के चलते मुद्रा बाजार पर नजर बनी हुई है।

आगे क्या रहेगा फोकस?

बाजार की दिशा अब वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। इसके अलावा आने वाले आर्थिक आंकड़े और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कोई बड़ा सकारात्मक या नकारात्मक ट्रिगर नहीं आता, तब तक बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव दिखा सकता है। ऐसे में निवेशकों को चयनात्मक और संतुलित रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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  • 17 February 2026, 10:25 AM IST