Gold-Silver Price Crash: रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद कीमती धातुओं में भूचाल, बजट 2026 से पहले अचानक पलटा बाजार

रिकॉर्ड तेजी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। प्रॉफिट बुकिंग, मजबूत डॉलर और बजट 2026 से पहले निवेशकों की सतर्कता ने बाजार में दबाव बढ़ा दिया। चांदी में सबसे ज्यादा नुकसान देखने को मिला, जबकि सोने की कीमतें भी फिसल गईं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 1 February 2026, 11:26 AM IST

New Delhi: लंबे समय से जारी ऐतिहासिक तेजी के बाद सोने और चांदी के बाजार में अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली है। निवेशकों द्वारा भारी मुनाफावसूली, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बजट 2026 से पहले बढ़ती सतर्कता के चलते कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। घरेलू स्पॉट मार्केट से लेकर वायदा बाजार तक बिकवाली का दबाव साफ नजर आया।

चांदी पर सबसे ज्यादा मार

कीमती धातुओं में चांदी को सबसे बड़ा झटका लगा है। घरेलू भौतिक बाजार में चांदी की कीमतों में करीब 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और दाम घटकर लगभग ₹3.12 लाख प्रति किलोग्राम (टैक्स सहित) पर आ गए। सप्ताह की शुरुआत में चांदी ₹4.04 लाख प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, लेकिन लगातार दूसरे सत्र में भारी बिकवाली ने निवेशकों को चौंका दिया।

मासिक आधार पर अब भी मजबूत

हालांकि, इस तेज गिरावट के बावजूद चांदी का लंबी अवधि का रुझान अभी भी सकारात्मक माना जा रहा है। जनवरी महीने में चांदी की कीमतों में 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद दीर्घकालिक निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

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सोने की कीमतों में भी आई कमजोरी

सोने की कीमतों पर भी बिकवाली का असर दिखा। स्पॉट मार्केट में सोना 2 प्रतिशत से अधिक फिसलकर करीब ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले सोना ₹1.83 लाख प्रति 10 ग्राम के अपने अब तक के उच्चतम स्तर तक पहुंचा था। जनवरी के दौरान सोने में 20 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली, जो सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में इसकी मजबूत मांग को दर्शाती है।

MCX फ्यूचर्स में भारी गिरावट

वायदा बाजार में गिरावट और ज्यादा तीखी रही। MCX के आंकड़ों के मुताबिक, सोने के फ्यूचर्स में लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और भाव ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बंद हुए। वहीं चांदी के फ्यूचर्स में करीब 27 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई, जिससे एक ही सत्र में प्रति किलोग्राम एक लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।

गिरावट के पीछे क्या हैं कारण?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने आक्रामक प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और मजबूत डॉलर ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया। बजट 2026 से पहले निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

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आगे बाजार की दिशा क्या होगी?

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाला ट्रेडिंग सेशन बेहद अहम रहेगा। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना प्रमुख स्तरों को दोबारा हासिल नहीं कर पाता, तो कीमतों में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि गिरावट के बीच-बीच में तकनीकी सुधार भी संभव है, जिससे बाजार में अस्थायी उछाल देखने को मिल सकता है।

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  • New Delhi

Published : 
  • 1 February 2026, 11:26 AM IST