
शेयर बाजार की सबसे बड़ी खबर (Img: Pinterest)
New Delhi: भारतीय शेयर बाजार में प्री-ओपन ऑक्शन सेशन के नियमों में बदलाव सोमवार से लागू हो गए हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने ओपनिंग प्राइस तय करने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए यह नया सिस्टम लागू किया है। इसका मकसद बाजार खुलने से पहले उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करना और बेहतर प्राइस डिस्कवरी सुनिश्चित करना है।
प्री-ओपन सेशन का इस्तेमाल बाजार के आधिकारिक तौर पर खुलने से पहले किसी स्टॉक का ओपनिंग प्राइस तय करने के लिए किया जाता है। पहले आखिरी मिनटों में मार्केट ऑर्डर की बाढ़ आने से अक्सर कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव होता था। नए नियम ऑर्डर एंट्री और मैचिंग प्रोसेस पर ज्यादा कंट्रोल लगाते हैं, जिससे शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान असामान्य उतार-चढ़ाव कम होने की उम्मीद है।
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यह नया सिस्टम इक्विटी कैश मार्केट के सभी शेयरों पर लागू होता है, जिसमें SME शेयर, REITs, InvITs और डेरिवेटिव-लिंक्ड प्रोडक्ट्स शामिल हैं। हालांकि प्री-ओपन सेशन की कुल अवधि सुबह 9:00 बजे से 9:15 बजे तक ही रहेगी। इस 15 मिनट की अवधि को अब अलग-अलग चरणों में बांटा गया है।
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मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, नए नियमों के तहत ट्रेडिंग के शुरुआती पांच मिनट बहुत अहम होंगे खासकर उन दिनों में जब रात भर में कोई बड़ी खबर आई हो या बाजार के बड़े गैप के साथ खुलने की संभावना हो। नए सिस्टम के तहत ओपनिंग प्राइस सप्लाई और डिमांड के बीच संतुलन के आधार पर तय किया जाएगा। जिस कीमत पर सबसे ज्यादा ट्रेड होंगे उसे 'ओपनिंग प्राइस' माना जाएगा।
उम्मीद है कि नए नियमों से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। ओपनिंग प्राइस में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव कम हो सकते हैं, जिससे ट्रेडर्स ज्यादा व्यवस्थित तरीके से ऑर्डर दे सकेंगे। हालांकि अब निवेशकों को 'प्री-ओपन सेशन' के शुरुआती दौर में अपनी रणनीतियों की योजना ज्यादा सावधानी से बनानी होगी क्योंकि आखिरी समय में ऑर्डर में बदलाव करने की सुविधा सीमित हो गई है।
Location : New Delhi
Published : 7 September 2026, 1:19 PM IST