बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू करने का ऐलान किया है। इसके लिए बजट बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये किया गया है, जिससे मेक इन इंडिया, रोजगार और टेक्नोलॉजी सेक्टर को मजबूती मिलेगी।
सेमीकंडक्टर सेक्टर
New Delhi: केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने भारत को टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू करने की घोषणा की। इस मिशन के तहत सेमीकंडक्टर सेक्टर में उद्योग के नेतृत्व में रिसर्च, डिजाइन और ट्रेनिंग सेंटर्स को बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन को और गति देने के लिए इसके बजट को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया है। इसका मकसद देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। बजट 2026 में इस सेक्टर को प्राथमिकता देते हुए खनिज-संपन्न राज्यों को विशेष सहयोग देने का भी ऐलान किया गया है।
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रणनीतिक और अग्रणी क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार📈
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इंडिया सेमिकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 का शुभारंभ जल्द
इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट विनिर्माण योजना के लिए परिव्यय बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये हो जाएंगे… pic.twitter.com/eYUFd1asn5
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) February 1, 2026
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज संसाधनों से भरपूर राज्यों को सेमीकंडक्टर और उससे जुड़े उद्योगों के लिए समर्थन दिया जाएगा। इसके साथ ही सरकार तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित करने में राज्यों की मदद करेगी। इन केमिकल पार्क्स से सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी कच्चे माल की घरेलू आपूर्ति मजबूत होगी और लोकल इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा।
सेमीकंडक्टर आज की लगभग हर आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी, कार, वॉशिंग मशीन, एसी, इंटरनेट डिवाइस और स्मार्ट गैजेट्स सभी में सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल होता है। फिलहाल भारत अपनी जरूरत की अधिकांश चिप्स विदेशों से आयात करता है, जिसमें सबसे ज्यादा निर्भरता चीन पर है। अगर देश में ही सेमीकंडक्टर का उत्पादन बढ़ता है, तो न सिर्फ लागत कम होगी, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट का खतरा भी घटेगा।
देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग शुरू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, ऑटोमोबाइल और डिफेंस सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा। सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों, रिसर्च लैब्स और चिप डिजाइन सेंटर्स के जरिए लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। डिफेंस, स्पेस, मिसाइल टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाली चिप्स अगर भारत में ही बनेंगी, तो देश की रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी।
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AI, 5G और आने वाली 6G टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, डेटा सेंटर्स और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए सेमीकंडक्टर बेहद जरूरी हैं। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के जरिए सरकार भारत को ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है।