8th Pay Commission को लेकर कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच नई हलचल तेज हो गई है। कई अहम मुद्दों को लेकर बड़ा सुझाव सामने आया है, जिसने वेतन, पेंशन और कर्मचारी हितों पर चर्चा बढ़ा दी है। आखिर क्या मांगे उठी हैं और इसका किस पर असर पड़ेगा, जानिए पूरी खबर में।

प्रतीकात्मक छवि ( Img: Google)
New Delhi: 8th Pay Commission को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच हलचल तेज हो गई है। आयोग ने वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े सुझाव लेने के लिए 18 सवालों वाली प्रश्नावली जारी की है। इसी बीच NC-JCM की स्टाफ साइड ने 9 अहम बिंदु जोड़ने की सिफारिश की है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स की आवाज पूरी मजबूती से आयोग तक पहुंच सके।
NC-JCM केंद्र सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच संवाद का एक आधिकारिक मंच है। यही संस्था कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, सेवा शर्तों और कल्याण से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने रखती है। 1 अप्रैल 2026 को NC-JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने 8th Pay Commission के सदस्य सचिव पंकज जैन को पत्र लिखकर कहा कि मौजूदा प्रश्नावली में कुछ जरूरी विषयों को और स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
NC-JCM ने सबसे पहले पेंशनर्स के मुद्दों को अलग से शामिल करने की मांग की है। इसमें रिटायरमेंट बेनिफिट्स, पेंशन रिवीजन, पेंशन समानता, कम्यूटेड पेंशन की बहाली और पेंशन बढ़ोतरी जैसे मुद्दे शामिल हैं। संगठन का कहना है कि 8th Pay Commission की सिफारिशें तभी संतुलित होंगी, जब रिटायर्ड कर्मचारियों की चिंताओं को भी बराबरी से सुना जाएगा।
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कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा NPS (National Pension System) और UPS (Universal Pension Scheme) को लेकर बना हुआ है। NC-JCM ने मांग की है कि CCS (Pension) Rules 1972/2021 के तहत पुरानी गैर-अंशदायी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने पर भी कर्मचारियों से राय ली जाए। इससे इस संवेदनशील विषय पर आयोग को सीधा फीडबैक मिल सकेगा।
संगठन ने महिला कर्मचारियों के लिए भी अलग सेक्शन जोड़ने की मांग की है। इसमें वर्कप्लेस सेफ्टी, मैटरनिटी बेनिफिट्स, मेंस्ट्रुअल वेलफेयर, चाइल्ड केयर लीव और जेंडर इक्विटी जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा अलग-अलग विभागों की कैडर-विशिष्ट समस्याओं को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है, ताकि हर विभाग अपनी अलग चुनौतियों को आयोग के सामने रख सके।
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NC-JCM ने आयोग से कहा है कि विभागीय मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तारीख 31 मई 2026 तक बढ़ाई जाए। साथ ही, मौजूदा 3500 कैरेक्टर लिमिट को बढ़ाकर 1000 शब्द प्रति विषय करने और 2 MB अटैचमेंट लिमिट को बढ़ाकर 10 MB करने की मांग भी की गई है। संगठन का कहना है कि इतने बड़े मुद्दों को कम शब्दों और सीमित दस्तावेजों में समेटना मुश्किल है।
NC-JCM ने यह भी कहा है कि सिर्फ ऑनलाइन सबमिशन पर निर्भर रहने के बजाय आयोग को ईमेल और हार्ड कॉपी के जरिए भी सुझाव लेने चाहिए। इससे ज्यादा से ज्यादा कर्मचारी, यूनियन और एसोसिएशन आसानी से अपनी बात आयोग तक पहुंचा सकेंगे।