कानूनी दांवपेच में जीते लालू प्रसाद यादव: SC ने ठुकराई जमानत रद्द करने की मांग, क्या बंद होगा जेल जाने का रास्ता?

देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से लालू यादव को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने 7 साल पुरानी अर्जी का हवाला देते हुए CBI की जमानत रद्द करने की याचिका खारिज कर दी और अब सीधे मुख्य अपील पर तेजी से सुनवाई का नया रास्ता चुना है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 14 July 2026, 3:25 PM IST

Patna: RJD के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से देवघर चारा घोटाला मामले में एक बड़ी और रणनीतिक राहत मिली है। अदालत ने न सिर्फ उनकी जमानत रद्द करने की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की याचिका को ठुकरा दिया, बल्कि इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।

कोर्ट ने अब जमानत के तकनीकी विवाद में उलझने के बजाय सीधे उस मुख्य अपील पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है, जो लालू यादव की सजा के खिलाफ लंबित है।

CBI पर भारी पड़ी 7 साल की देरी

जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की पीठ के सामने जब यह मामला आया, तो कोर्ट ने समय के अंतराल को सबसे बड़ा आधार बनाया। बेंच ने साफ कहा कि चूंकि झारखंड हाई कोर्ट के जमानत आदेश के खिलाफ CBI की यह अपील साल 2018 से लंबित है और अब सात साल बीत चुके हैं, इसलिए इस मोड़ पर आकर जमानत के आदेश में दखल देना व्यावहारिक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि अदालत अब प्रक्रियात्मक बहसों के बजाय अंतिम न्याय की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।

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सिब्बल और राजू के बीच सजा की अवधि पर तीखी बहस

सुनवाई के दौरान अदालत का माहौल तब गरमा गया जब CBI की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू और लालू यादव की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अपनी दलीलें रखीं। ASG राजू ने तर्क दिया कि लालू यादव ने अपनी आधी सजा पूरी नहीं की थी और हाई कोर्ट ने तथ्यों को नजरअंदाज कर जमानत दी।

इसके जवाब में कपिल सिब्बल ने क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 427 का हवाला देते हुए पलटवार किया कि सजाओं के एक साथ या अलग-अलग चलने का नियम अंतिम फैसले के समय देखा जाता है, न कि अंतरिम जमानत के चरण में।

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सुप्रीम कोर्ट का नया रुख

दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कर दिया कि वे चुनौती दिए गए पुराने आदेश को नहीं बदलेंगे। इसके बजाय, शीर्ष अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह ट्रायल कोर्ट के मुख्य फैसले के खिलाफ लालू यादव की अपील पर सुनवाई की रफ्तार तेज करे।

इस फैसले से साफ है कि लालू यादव फिलहाल जेल से बाहर ही रहेंगे, लेकिन अब उनकी किस्मत का असली फैसला हाई कोर्ट में होने वाली इस मुख्य और त्वरित सुनवाई पर निर्भर करेगा।

Location :  New Delhi

Published :  14 July 2026, 3:25 PM IST