
कितनी बार 'पलटी' मार चुके हैं नीतीश कुमार (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Patna: बिहार में दो दशकों से सत्ता के केंद्र में रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लंबे राजनीतिक सफर में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जो भारतीय राजनीति में अनोखा माना जा रहा है। कभी गठबंधन बदलने, कभी इस्तीफा देने और फिर वापसी करने की राजनीति ने बिहार को लगातार राजनीतिक अस्थिरता के दौर में रखा।
करीब 21 साल से बिहार की राजनीति नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। साल 2005 के बाद से वे लगातार राज्य की सत्ता में बने रहे, लेकिन इस दौरान सरकार का स्वरूप और गठबंधन बार-बार बदलता रहा। यही वजह है कि उन्हें बिहार की राजनीति का 'बेताज बादशाह' भी कहा जाता रहा है।
इस दौरान न सिर्फ मुख्यमंत्री का चेहरा अधिकतर एक ही रहा, बल्कि राजनीतिक समीकरण भी बार-बार बदलते रहे। कभी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ, तो कभी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के साथ मिलकर उन्होंने सरकार चलाई।
नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा
जानकारी के अनुसार नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और 6 बार इस्तीफा दिया है। यह आंकड़ा उन्हें भारतीय राजनीति में एक अलग पहचान देता है। पहली बार वे वर्ष 2000 में मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण एक सप्ताह के भीतर ही इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद 2005 में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया, लेकिन स्थिरता कम और बदलाव अधिक देखने को मिले।
नीतीश कुमार की राजनीति का सबसे बड़ा आधार गठबंधन रहा है। उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) कभी भी अकेले दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी। इसी वजह से सरकार बनाने और चलाने के लिए उन्हें लगातार सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा।
कभी NDA के साथ, कभी महागठबंधन के साथ और फिर वापस NDA में लौटने का सिलसिला चलता रहा। हर बड़े राजनीतिक बदलाव के साथ सरकार का ढांचा भी बदलता रहा। 2010 में JD(U) का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन 115 सीटों के रूप में सामने आया, लेकिन फिर भी पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई।
पर्दे के पीछे से नई सरकार चलाएंगे नीतीश कुमार?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नीतीश कुमार के इस्तीफे केवल राजनीतिक मजबूरी नहीं बल्कि रणनीतिक फैसले भी रहे हैं। कई बार उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी का हवाला देते हुए पद छोड़ा और कुछ ही समय बाद नए गठबंधन के साथ फिर सत्ता में लौट आए।
2014 में लोकसभा चुनाव के बाद इस्तीफा, 2017 में महागठबंधन से अलग होना, 2022 में NDA से दूरी और फिर वापसी- यह पैटर्न बिहार की राजनीति में लगातार देखा गया। इस दौरान एक बार जीतन राम मांझी को भी कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री बनाया गया था, जिन्होंने 2014 से 2015 तक सत्ता संभाली थी।
ताजा राजनीतिक घटनाक्रमों के अनुसार राज्य में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की स्थिति बनी है। इस बदलाव को बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।
उनका यह रिकॉर्ड- 10 बार शपथ, 6 बार इस्तीफा और लगातार बदलते गठबंधन- बिहार की राजनीति को एक अनोखी पहचान देता है, जहां सत्ता बहुमत से ज्यादा समीकरणों पर टिकती दिखाई देती है।
Location : Patana
Published : 14 April 2026, 4:33 PM IST