बिहार में ड्रग विभाग का बड़ा एक्शन: पूर्व सांसद के मकान में चल रहा था नशे का काला कारोबार, जानें कैसे हुआ खुलासा

बिहार के गया में ड्रग विभाग और पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व सांसद की बिल्डिंग से 25 लाख से अधिक मूल्य की नकली व नशीली दवाएं बरामद की हैं। अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े आरोपी किराएदार को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी गई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 May 2026, 3:49 PM IST

Gaya: बिहार के गया शहर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत न्यू पीपरपाती मोहल्ले में सोमवार (25 मई 2026) को पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त टीम ने एक बड़ी छापेमारी की। यह कार्रवाई पूर्व सांसद स्वर्गीय रंजीत सिंह उर्फ रंग सिंह की बिल्डिंग में की गई, जहां से भारी मात्रा में नकली और नशीली दवाएं बरामद की गई हैं। इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। ड्रग विभाग के अनुसार जब्त की गई दवाओं की कीमत करीब 25 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है।

सरकारी दफ्तर की आड़ में चल रहा था खेल

हैरानी की बात यह है कि जिस बिल्डिंग से नशे का यह काला कारोबार संचालित हो रहा था, उसी मकान में किराए पर 'पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग' का सरकारी कार्यालय भी चल रहा था। सरकारी दफ्तर होने के कारण इस जगह पर किसी को आसानी से शक नहीं होता था। पूर्व सांसद की मौत के बाद उनके परिजनों ने इस बिल्डिंग के कुछ हिस्से किराए पर दे दिए थे। इसी का फायदा उठाकर विकास कुमार मौहरी नाम का किराएदार यहाँ गुप्त रूप से नकली और प्रतिबंधित दवाओं का बड़ा स्टॉक जमा कर रहा था।

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चार राज्यों में फैला था अवैध नेटवर्क

गोपनीय सूचनाओं के आधार पर जब ड्रग इंस्पेक्टर विजय कुमार और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से जाल बिछाकर छापेमारी की, तो मकान के कई कमरों से दवाओं के भारी-भरकम कार्टन और पैकेट बरामद हुए। मौके से मुख्य आरोपी किराएदार विकास कुमार मौहरी को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रारंभिक पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच में सामने आया है कि इस अवैध नेटवर्क के तार केवल बिहार ही नहीं, बल्कि झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों से भी जुड़े हुए थे। बाहरी राज्यों से थोक में दवाएं लाकर यहाँ छिपाई जाती थीं और फिर मांग के अनुसार सप्लाई होती थी।

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युवाओं को निशाना बना रहा था गिरोह

बरामद की गई दवाओं की खेप में सबसे बड़ी मात्रा प्रतिबंधित कफ सिरप और भारी डोज वाली नींद की गोलियों की है। अधिकारियों के मुताबिक, इन दवाओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से नशे के तौर पर किया जाता था। इस गिरोह का मुख्य टारगेट स्कूल-कॉलेज के युवा और नशे के आदी लोग थे। फिलहाल पुलिस और ड्रग विभाग की टीम दवाओं की सटीक गिनती और उनके साल्ट का मिलान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी विकास से पूछताछ के आधार पर जल्द ही इस अंतरराज्यीय गिरोह के अन्य गुर्गों को भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

Location :  Gaya

Published :  25 May 2026, 3:49 PM IST