अजान होते ही बंद हो जाता है दुर्गा पूजा पंडाल का लाउडस्पीकर, 50 साल से कायम है बगहा की ये अनोखी मिसाल

बिहार के बगहा में एक ऐसा मोहल्ला है, जहां मां दुर्गा की आरती और मस्जिद की अजान के बीच भाईचारे की मिसाल कायम है। करीब 50 साल से हिंदू-मुस्लिम परिवार मिलकर दुर्गा पूजा का आयोजन करते आ रहे हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 October 2026, 8:26 PM IST

Bagaha: त्योहार लोगों को जोड़ते हैं और आपसी रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा शहर में इसका एक खूबसूरत उदाहरण देखने को मिलता है। यहां मलकौली-पठखौली मोहल्ले में मां दुर्गा की आरती और मस्जिद की अजान के बीच भाईचारे की परंपरा करीब 50 साल से चली आ रही है। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर दुर्गा पूजा का आयोजन करते हैं और एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं।

पूजा की तैयारियों में साथ आते हैं दोनों समुदाय

मलकौली-पठखौली में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले को जोड़ने वाला उत्सव है। पूजा पंडाल तैयार करने, सजावट कराने, चंदा जुटाने और दूसरी व्यवस्थाओं को संभालने में दोनों समुदायों के लोग अपनी भूमिका निभाते हैं। सभी मिलकर आयोजन को सफल बनाने और पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटे रहते हैं। त्योहार के दौरान मोहल्ले में उत्साह का माहौल रहता है। लोग मिल-जुलकर जिम्मेदारियां निभाते हैं और इस तरह आपसी सहयोग की मिसाल पेश करते हैं।

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इस बार तिरुपति बालाजी की थीम पर सजा पंडाल

इस वर्ष दुर्गा पूजा के लिए मंदिर के सामने तिरुपति बालाजी की थीम पर भव्य पंडाल बनाया गया है। इसकी आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही है। मां दुर्गा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। पंडाल को खास बनाने में समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने योगदान दिया है। पिछले साल यहां राम मंदिर की थीम पर पंडाल तैयार किया गया था। हर साल अलग-अलग विषयों पर सजावट करने की परंपरा के चलते यहां का पंडाल श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना रहता है।

मंदिर और मस्जिद बनाने में भी मिला था साथ

स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब पांच दशक पहले मोहल्ले में मंदिर निर्माण के दौरान हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर सहयोग किया था। मस्जिद के निर्माण में भी दोनों समुदायों की भागीदारी रही। इसी साझा प्रयास ने लोगों के बीच विश्वास और आपसी सम्मान को मजबूत किया। समय के साथ यह परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुंचती रही। आज भी मोहल्ले के लोग एक-दूसरे की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए सामाजिक रिश्तों को प्राथमिकता देते हैं।

अजान के समय बंद कर दिया जाता है लाउडस्पीकर

मस्जिद के इमाम मौलाना जमील बताते हैं कि मोहल्ले में लोग प्रेम और भाईचारे के साथ रहते हैं। यहां एक-दूसरे की आस्था का सम्मान किया जाता है। अजान के समय दुर्गा पूजा पंडाल का लाउडस्पीकर बंद कर दिया जाता है, ताकि नमाज और इबादत में किसी तरह की परेशानी न हो।

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वहीं, पुजारी दीपेंद्र कुमार मिश्रा भी आपसी सहयोग को मोहल्ले की पहचान बताते हैं। उनके मुताबिक, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और सम्मान देना सामाजिक एकता को मजबूत बनाता है।

एक-दूसरे के त्योहारों में भी निभाते हैं साथ

मां जगदंबा आराधक संघ सेवा समिति के अध्यक्ष अजय मोहन गुप्ता, सचिव राहुल कुमार गुप्ता और उपाध्यक्ष मनोज जायसवाल सहित समिति के अन्य सदस्यों का कहना है कि दोनों समुदाय एक-दूसरे के त्योहारों में सहयोग करते हैं। यह मेलजोल केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के रिश्तों में भी दिखाई देता है। मलकौली-पठखौली की यह परंपरा बताती है कि अलग-अलग आस्थाओं के बावजूद लोग मिलकर रह सकते हैं और खुशियां बांट सकते हैं।

Location :  Bagaha

Published :  18 October 2026, 8:26 PM IST