
जब मजबूरी ने बना दिया धावक (Source: X)
महाराष्ट्र: सुबह का वक्त था। सामने दौड़ रहे थे कई युवा धावक, लेकिन उनके बीच साड़ी पहने और नंगे पैर दौड़ रही एक महिला ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उम्र करीब 60 साल से ज्यादा थी और दौड़ने की कोई खास ट्रेनिंग भी नहीं थी। लेकिन उस दिन लता भगवान करे के लिए यह सिर्फ एक दौड़ नहीं थी। उनके सामने एक ऐसा मकसद था, जिसके लिए वह अपनी पूरी ताकत लगा देना चाहती थीं।
लता के पति भगवान करे की तबीयत खराब थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि महंगे मेडिकल टेस्ट आसानी से कराए जा सकें। पति के इलाज के लिए MRI की जरूरत थी और इसके लिए करीब 5,000 रुपये की रकम चाहिए थी। यही रकम जुटाने के लिए लता ने दौड़ में हिस्सा लेने का फैसला किया।
लता को बारामती में आयोजित होने वाली दौड़ के बारे में जानकारी मिली। उन्हें पता चला कि इसमें जीतने वाले प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने दौड़ में हिस्सा लेने का फैसला कर लिया।
न कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग, न स्पोर्ट्स शूज और न ही कोई विशेष तैयारी। लता पारंपरिक साड़ी पहनकर नंगे पैर दौड़ने पहुंचीं। उनके सामने कई युवा धावक थे, लेकिन पति की जिंदगी बचाने की चिंता उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ा रही थी।
फिर जो हुआ, उसने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया।
लता ने 3 किलोमीटर की दौड़ पूरी की और अपने वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। जीत के बाद उन्हें 5,000 रुपये की पुरस्कार राशि मिली। यही रकम उनके लिए किसी बड़ी दौलत से कम नहीं थी। रिपोर्टों के मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल पति के MRI और इलाज के लिए किया गया।
लता की यह कहानी सामने आने के बाद उनकी तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। देखते ही देखते वह देशभर में चर्चा का विषय बन गईं। कई पोस्ट में उन्हें 65 वर्षीय महिला बताया गया और इस दौड़ को “मैराथन” कहा गया।
लेकिन यहीं इस कहानी का एक जरूरी फैक्ट सामने आता है।
उपलब्ध पुरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लता ने 2013 में महाराष्ट्र के बारामती में आयोजित 3 किलोमीटर की रेस में हिस्सा लिया था। यानी इसे पूरी मैराथन कहना सही नहीं होगा। मैराथन की आधिकारिक दूरी 42.195 किलोमीटर होती है।
वायरल पोस्ट में लता की उम्र 65 साल बताई जाती है, लेकिन उनकी उम्र को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। अलग-अलग मीडिया में उनकी उम्र 2013 की रिपोर्ट में 66 साल, जबकि किसी ने 61 साल लिखी है। कुछ बाद की रिपोर्टों में उनकी उम्र करीब 60 साल बताई गई। इसलिए “65 साल की लता” कहना पूरी तरह निश्चित तथ्य नहीं है। इतना जरूर स्पष्ट है कि वह उस समय 60 साल से अधिक उम्र की महिला थीं।
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लता की जिंदगी की यह घटना इतनी प्रेरणादायक थी कि बाद में उनके जीवन पर फिल्म भी बनाई गई। 2020 में मराठी बायोग्राफिकल फिल्म ‘Lata Bhagwan Kare’ रिलीज हुई। खास बात यह थी कि फिल्म में लता भगवान करे ने खुद अपनी भूमिका निभाई। फिल्म को 67वें National Film Awards में Special Mention भी मिला।
तो क्या लता भगवान करे की कहानी झूठी है?
नहीं। कहानी का मूल सच है। उन्होंने वास्तव में बारामती में नंगे पैर और साड़ी पहनकर दौड़ लगाई थी और जीत हासिल की थी। पुरस्कार राशि का इस्तेमाल पति के इलाज के लिए किए जाने की बात भी कई रिपोर्टों में सामने आई है।
हालांकि सोशल मीडिया पर कहानी को शेयर करते समय कुछ तथ्य बदल गए। उनकी उम्र को 65 साल बताया गया, जबकि पुरानी रिपोर्टों में अलग-अलग उम्र दर्ज है। इसी तरह 3 किलोमीटर की रेस को कई जगह “मैराथन” कह दिया गया।
यानी कहानी सच्ची है, लेकिन वायरल पोस्ट का हर शब्द सही नहीं है।
लता की कहानी की असली ताकत भी यहीं है। एक महिला, जिसके पास पति के इलाज के लिए पैसे नहीं थे, उसने अपनी मजबूरी को कमजोरी नहीं बनने दिया। उसने दौड़ लगाई, जीत हासिल की और उस जीत की रकम को पति के इलाज में लगा दिया। यही जज्बा आज भी उनकी कहानी को लोगों के बीच जिंदा रखे हुए है।
Location : New Delhi
Published : 9 August 2026, 8:24 AM IST