सोनभद्र में धान खरीद बंद किए जाने के फैसले पर सपा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन किया। किसान परेशान हैं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं, प्रदर्शन ने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।

Sonbhadra: सोनभद्र जिले में धान खरीद बंद किए जाने के फैसले को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। शुक्रवार को सपा कार्यकर्ताओं ने धान खरीद दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।
आक्रोशित कार्यकर्ता ट्रैक्टरों पर धान लादकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और हाथों में धान की बालियां और बोरे लेकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
सपा जिला पदाधिकारियों ने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने के लिए क्रय केंद्रों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन अचानक धान खरीद बंद कर दिए जाने से किसान परेशान हैं। कई किसान मजबूरी में औने-पौने दामों पर धान बेचने को विवश हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। धान खरीद बंद होने से किसानों की मेहनत और वर्षभर की तैयारी पर पानी फिर रहा है।
Sonbhadra: सोनभद्र जिले में धान खरीद बंद किए जाने के फैसले को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। शुक्रवार को सपा कार्यकर्ताओं ने धान खरीद दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।
आक्रोशित कार्यकर्ता ट्रैक्टरों पर धान लादकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और हाथों में धान की बालियां और बोरे लेकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
सपा जिला पदाधिकारियों ने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने के लिए क्रय केंद्रों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन अचानक धान खरीद बंद कर दिए जाने से किसान परेशान हैं। कई किसान मजबूरी में औने-पौने दामों पर धान बेचने को विवश हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। धान खरीद बंद होने से किसानों की मेहनत और वर्षभर की तैयारी पर पानी फिर रहा है।