मैनपुरी के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक ‘राजा का ताल’ पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जे और निर्माण की कोशिश तेज हो गई है। तालाब की जमीन पाटे जाने के आरोप हैं। गाटा संख्या 2688, 643 और 789 सरकारी रिकॉर्ड में तालाब दर्ज होने के बावजूद नियमों की अनदेखी से पर्यावरण और विरासत पर खतरा मंडरा रहा है।

Mainpuri: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी शहर के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक और प्राचीन ‘राजा का ताल’ एक बार फिर विवादों में आ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब की जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा करने और निर्माण की तैयारी तेज कर दी गई है। आरोप है कि तालाब के एक हिस्से को पाटकर वहां निर्माण कराने की साजिश रची जा रही है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार ‘राजा का ताल’ न केवल मैनपुरी की ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन में भी अहम भूमिका निभाता रहा है। तालाब के भरने से भूजल स्तर, जल निकासी और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो आने वाले वर्षों में इसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ सकता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी अभिलेखों में गाटा संख्या 2688, 643 और 789 स्पष्ट रूप से तालाब के रूप में दर्ज हैं। इसके बावजूद कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध गतिविधियां की जा रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे हुए हैं, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
मामले को लेकर क्षेत्रवासियों में रोष बढ़ता जा रहा है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मौके पर जांच कराई जाए, अवैध निर्माण पर रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर ऐतिहासिक जलस्रोतों को इसी तरह खत्म किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में ही इन धरोहरों को देख पाएंगी।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जनता की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
Mainpuri: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी शहर के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक और प्राचीन ‘राजा का ताल’ एक बार फिर विवादों में आ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब की जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा करने और निर्माण की तैयारी तेज कर दी गई है। आरोप है कि तालाब के एक हिस्से को पाटकर वहां निर्माण कराने की साजिश रची जा रही है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार ‘राजा का ताल’ न केवल मैनपुरी की ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन में भी अहम भूमिका निभाता रहा है। तालाब के भरने से भूजल स्तर, जल निकासी और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो आने वाले वर्षों में इसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ सकता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी अभिलेखों में गाटा संख्या 2688, 643 और 789 स्पष्ट रूप से तालाब के रूप में दर्ज हैं। इसके बावजूद कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध गतिविधियां की जा रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे हुए हैं, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
मामले को लेकर क्षेत्रवासियों में रोष बढ़ता जा रहा है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मौके पर जांच कराई जाए, अवैध निर्माण पर रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर ऐतिहासिक जलस्रोतों को इसी तरह खत्म किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में ही इन धरोहरों को देख पाएंगी।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जनता की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।