
New Delhi: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में निजी क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी को लेकर पहली बार कर्मचारी खुलकर सामने आ गए हैं। इसरो के नौ प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने अंतरिक्ष विभाग के सचिव और इसरो अध्यक्ष को पत्र भेजकर संस्था के भविष्य और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कई तीखे सवाल दागे हैं।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या इसरो को धीरे-धीरे केवल रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) तक सीमित कर दिया जाएगा। यूनियनों ने इन-स्पेस (IN-SPACe) के अध्यक्ष पवन गोयनका के उस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया था कि भविष्य में इसरो प्रक्षेपण यान (रॉकेट) नहीं बनाएगा।
कर्मचारियों का कहना है कि पीएसएलवी और एलवीएम3 जैसे रॉकेटों का निर्माण और प्रक्षेपण कोई सामान्य काम नहीं, बल्कि इसरो की मुख्य ताकत है। अगर यह काम निजी हाथों में चला गया तो इसरो में स्वीकृत पदों में कटौती होगी, नई भर्तियां रुकेंगी और प्रमोशन के मौके सीमित हो जाएंगे।
वैज्ञानिकों का क्या होगा? ISRO के निजीकरण मामले ने पकड़ा तूल; कर्मचारी सगंठनों ने खोला मोर्चा
कर्मचारी संगठनों ने साफ किया है कि वे कमर्शियल गतिविधियों में प्राइवेट कंपनियों के आने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सार्वजनिक धन से विकसित तकनीकों और लॉन्च पैड को निजी क्षेत्र को सौंपने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस नीतिगत बदलाव की पूरी जानकारी लिखित रूप में दी जाए ताकि कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा संशय दूर हो सके।
New Delhi: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में निजी क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी को लेकर पहली बार कर्मचारी खुलकर सामने आ गए हैं। इसरो के नौ प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने अंतरिक्ष विभाग के सचिव और इसरो अध्यक्ष को पत्र भेजकर संस्था के भविष्य और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कई तीखे सवाल दागे हैं।
कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या इसरो को धीरे-धीरे केवल रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) तक सीमित कर दिया जाएगा। यूनियनों ने इन-स्पेस (IN-SPACe) के अध्यक्ष पवन गोयनका के उस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया था कि भविष्य में इसरो प्रक्षेपण यान (रॉकेट) नहीं बनाएगा।
कर्मचारियों का कहना है कि पीएसएलवी और एलवीएम3 जैसे रॉकेटों का निर्माण और प्रक्षेपण कोई सामान्य काम नहीं, बल्कि इसरो की मुख्य ताकत है। अगर यह काम निजी हाथों में चला गया तो इसरो में स्वीकृत पदों में कटौती होगी, नई भर्तियां रुकेंगी और प्रमोशन के मौके सीमित हो जाएंगे।
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कर्मचारी संगठनों ने साफ किया है कि वे कमर्शियल गतिविधियों में प्राइवेट कंपनियों के आने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सार्वजनिक धन से विकसित तकनीकों और लॉन्च पैड को निजी क्षेत्र को सौंपने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस नीतिगत बदलाव की पूरी जानकारी लिखित रूप में दी जाए ताकि कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा संशय दूर हो सके।
Location : New Delhi
Published : 6 September 2026, 1:02 PM IST