भारत सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रुपये घटाई और डीजल पर इसे शून्य किया। मिडिल ईस्ट तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच यह कदम जनता को राहत देने के लिए। जानकारों का कहना है कि इसका पूरा फायदा तुरंत नहीं मिल सकता, तेल कंपनियों पर निर्भर।

New Delhi: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, भारत सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर करीब 3 रुपये कर दी है, जबकि डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है।
दरअसल, पेट्रोल-डीजल के दाम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां तय करती हैं। ये कंपनियां कीमत तय करते समय अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अपने मार्जिन को ध्यान में रखती हैं।
इसी वजह से जानकार मानते हैं कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती का पूरा फायदा तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचे। यह जरूरी नहीं है। खासतौर पर तब, जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई हो और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी हो।
इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार का उद्देश्य महंगाई के दबाव से जनता को राहत देना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बावजूद सरकार आवश्यक आपूर्ति को सुरक्षित रखने और लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये तक एक्साइज ड्यूटी घटाने के फैसले से लोगों की उम्मीदें जरूर बढ़ी हैं लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है क्या इसका फायदा सीधे आपकी जेब तक पहुंचेगा? ऐसे में ये फैसला राहत की दिशा में बड़ा कदम जरूर है लेकिन पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और तेल कंपनियों के फैसलों पर निर्भर करेगा।
New Delhi: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, भारत सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर करीब 3 रुपये कर दी है, जबकि डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है।
दरअसल, पेट्रोल-डीजल के दाम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां तय करती हैं। ये कंपनियां कीमत तय करते समय अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अपने मार्जिन को ध्यान में रखती हैं।
इसी वजह से जानकार मानते हैं कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती का पूरा फायदा तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचे। यह जरूरी नहीं है। खासतौर पर तब, जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई हो और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी हो।
इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार का उद्देश्य महंगाई के दबाव से जनता को राहत देना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बावजूद सरकार आवश्यक आपूर्ति को सुरक्षित रखने और लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये तक एक्साइज ड्यूटी घटाने के फैसले से लोगों की उम्मीदें जरूर बढ़ी हैं लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है क्या इसका फायदा सीधे आपकी जेब तक पहुंचेगा? ऐसे में ये फैसला राहत की दिशा में बड़ा कदम जरूर है लेकिन पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और तेल कंपनियों के फैसलों पर निर्भर करेगा।