
New Delhi: महाराष्ट्र के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस समय एक नया और बेहद तीखा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में गठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके ने देश के दिग्गज और सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी व समाजसेवी अन्ना हजारे को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दिया है, जिससे हर तरफ आक्रोश फैल गया है। दिपके ने केवल अन्ना हजारे का अपमान ही नहीं किया, बल्कि बुजुर्गों के अनुभव को दरकिनार करते हुए उन्हें सक्रिय जीवन से संन्यास लेने का फरमान सुना दिया है।
यह पूरा मामला छत्रपति संभाजी नगर का है, जहां मीडिया से बातचीत के दौरान जब अभिजीत दिपके से पूछा गया कि क्या वे अपने आगामी आंदोलनों में अन्ना हजारे का समर्थन या सहयोग लेंगे? इस पर सम्मान जताने के बजाय दिपके ने तीखे तेवर अपनाए। उन्होंने कहा कि जो लोग 60-70 साल के हो गए हैं, उन्हें अब राजनीति और एक्टिविज़्म से रिटायर होकर किसी आश्रम में बैठ जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि छात्रों और युवाओं का भविष्य तय करने का अधिकार सिर्फ युवाओं को है, न कि इन 'बुड्ढे लोगों' को जिनका सब कुछ हो चुका है।
अभिजीत दिपके का यह बयान सामने आते ही इंटरनेट पर यूजर्स ने उन्हें उनके ही बुने जाल में बुरी तरह घेर लिया। सोशल मीडिया पर लोग उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं और इसे सस्ती लोकप्रियता बटोरने का घटिया हथकंडा बता रहे हैं। जनता ने दिपके के दोहरे मापदंड पर एक बहुत ही तार्किक और तीखा सवाल पूछा है। लोगों का कहना है कि अगर 60 साल की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों को आंदोलन से दूर रहना चाहिए, तो फिर हाल ही में हुए प्रदर्शनों में 59 वर्ष के लद्दाख के मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का नेतृत्व दीपके को कैसे स्वीकार्य था?
अन्ना हजारे वह नाम हैं जिन्होंने देश से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया और दिल्ली के रामलीला मैदान से लेकर पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक नई नवेली पार्टी का नेता, जिसे राजनीति की जमीनी हकीकत सीखने में अभी सालों लगेंगे, वह अन्ना हजारे जैसे कद के नेता को रिटायर होने की सलाह दे रहा है। इतिहास गवाह है कि जो आंदोलन बुजुर्गों के मार्गदर्शन और तजुर्बे को नकार देते हैं, वे अक्सर दिशाहीन होकर बिखर जाते हैं। युवा होने के अहंकार में बुजुर्गों को हाशिये पर धकेलना किसी भी राजनीतिक दल के पतन की शुरुआत माना जाता है।
New Delhi: महाराष्ट्र के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस समय एक नया और बेहद तीखा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में गठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके ने देश के दिग्गज और सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी व समाजसेवी अन्ना हजारे को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दिया है, जिससे हर तरफ आक्रोश फैल गया है। दिपके ने केवल अन्ना हजारे का अपमान ही नहीं किया, बल्कि बुजुर्गों के अनुभव को दरकिनार करते हुए उन्हें सक्रिय जीवन से संन्यास लेने का फरमान सुना दिया है।
यह पूरा मामला छत्रपति संभाजी नगर का है, जहां मीडिया से बातचीत के दौरान जब अभिजीत दिपके से पूछा गया कि क्या वे अपने आगामी आंदोलनों में अन्ना हजारे का समर्थन या सहयोग लेंगे? इस पर सम्मान जताने के बजाय दिपके ने तीखे तेवर अपनाए। उन्होंने कहा कि जो लोग 60-70 साल के हो गए हैं, उन्हें अब राजनीति और एक्टिविज़्म से रिटायर होकर किसी आश्रम में बैठ जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि छात्रों और युवाओं का भविष्य तय करने का अधिकार सिर्फ युवाओं को है, न कि इन 'बुड्ढे लोगों' को जिनका सब कुछ हो चुका है।
अभिजीत दिपके का यह बयान सामने आते ही इंटरनेट पर यूजर्स ने उन्हें उनके ही बुने जाल में बुरी तरह घेर लिया। सोशल मीडिया पर लोग उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं और इसे सस्ती लोकप्रियता बटोरने का घटिया हथकंडा बता रहे हैं। जनता ने दिपके के दोहरे मापदंड पर एक बहुत ही तार्किक और तीखा सवाल पूछा है। लोगों का कहना है कि अगर 60 साल की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों को आंदोलन से दूर रहना चाहिए, तो फिर हाल ही में हुए प्रदर्शनों में 59 वर्ष के लद्दाख के मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का नेतृत्व दीपके को कैसे स्वीकार्य था?
अन्ना हजारे वह नाम हैं जिन्होंने देश से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया और दिल्ली के रामलीला मैदान से लेकर पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक नई नवेली पार्टी का नेता, जिसे राजनीति की जमीनी हकीकत सीखने में अभी सालों लगेंगे, वह अन्ना हजारे जैसे कद के नेता को रिटायर होने की सलाह दे रहा है। इतिहास गवाह है कि जो आंदोलन बुजुर्गों के मार्गदर्शन और तजुर्बे को नकार देते हैं, वे अक्सर दिशाहीन होकर बिखर जाते हैं। युवा होने के अहंकार में बुजुर्गों को हाशिये पर धकेलना किसी भी राजनीतिक दल के पतन की शुरुआत माना जाता है।
Location : New Delhi
Published : 7 July 2026, 3:58 PM IST