उत्तराखंड में फिर कांपी धरती, 4.2 तीव्रता के झटकों से घरों से बाहर भागे लोग

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में शनिवार रात 8:07 बजे 4.2 तीव्रता का भूकंप आया। बसुंगा के जंगलों में जमीन से 11 किलोमीटर नीचे इसका केंद्र बताया गया। झटके महसूस होते ही लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। चार दिनों में भूकंप की दूसरी घटना से चिंता बढ़ी है। 1991 के विनाशकारी भूकंप की यादें भी ताजा हो गईं।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 10 October 2026, 9:30 PM IST
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Uttarakhand: उत्तराखंड के उत्तरकाशी और आसपास के इलाकों में शनिवार रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रात करीब 8:07 बजे धरती हिलने से लोगों में दहशत फैल गई। कई लोग घबराकर अपने घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से बाहर निकल आए। जिला आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.2 दर्ज की गई। इसका केंद्र उत्तरकाशी के बसुंगा क्षेत्र के जंगलों में जमीन से 11 किलोमीटर नीचे बताया गया है।

उत्तरकाशी में भूकंप के झटकों से एक बार फिर लोगों को पुराने विनाशकारी भूकंप की याद आ गई। भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों के भीतर भूकंप की यह दूसरी घटना बताई जा रही है। इससे पहले भी राज्य में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। लगातार आ रही ऐसी घटनाओं ने पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

चार दिन में दूसरी बार भूकंप से हिली धरती

उत्तरकाशी में शनिवार को आए भूकंप से पहले बीते मंगलवार रात भी उत्तराखंड में झटके महसूस किए गए थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात करीब 10:23 बजे आए भूकंप की तीव्रता 4.9 दर्ज की गई थी और उसका केंद्र चमोली जिले में बताया गया था।

चार दिनों के भीतर दो बार भूकंप आने से क्षेत्र में लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। शनिवार रात झटके महसूस होते ही कई लोग सुरक्षित स्थानों की ओर निकल आए। अचानक धरती हिलने से लोग घबरा गए। हालांकि, भूकंप से हुए नुकसान या किसी के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

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भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है उत्तरकाशी

उत्तरकाशी भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले के क्षेत्र भूकंपीय जोन चार और पांच में आते हैं। इस वजह से यहां भूकंप के झटकों को लेकर लोगों की चिंता स्वाभाविक है। पहाड़ी इलाकों में भूकंप के दौरान इमारतों की सुरक्षा और आपदा से निपटने की तैयारी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बार-बार महसूस होने वाले झटके स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की याद दिलाते हैं। ऐसे हालात में प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करना और आपात स्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी है।

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1991 के विनाशकारी भूकंप की यादें फिर ताजा

उत्तरकाशी में 20 अक्टूबर 1991 की रात आए विनाशकारी भूकंप की यादें आज भी लोगों के जेहन में हैं। उस भूकंप की तीव्रता 6.1 दर्ज की गई थी और इससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उस आपदा में 1,294 गांव प्रभावित हुए थे। 700 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि पांच हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसके बाद भी क्षेत्र में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

शनिवार रात आए 4.2 तीव्रता के भूकंप ने एक बार फिर उत्तरकाशी के लोगों को उस त्रासदी की याद दिला दी। संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में भूकंप से बचाव, जागरूकता और आपदा प्रबंधन की तैयारी का महत्व एक बार फिर सामने आया है।

Location :  Uttarakhand

Published :  10 October 2026, 9:30 PM IST

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