उत्तराखंड में गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और घरेलू व व्यावसायिक गैस की किल्लत के विरोध में विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने कई शहरों में प्रदर्शन किया। देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर और नैनीताल समेत कई जगहों पर कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और गैस की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने की मांग की।

LPG किल्लत पर उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन
Dehradun: रसोई गैस को लेकर बढ़ती बेचैनी अब सड़कों तक पहुंच चुकी है। महंगाई और गैस सिलेंडर की किल्लत ने ऐसा माहौल बना दिया है कि विरोध की आग उत्तराखंड के कई शहरों में भड़क उठी। शनिवार को देहरादून से लेकर रामनगर और ऋषिकेश तक विपक्षी दलों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। नारेबाजी, प्रदर्शन और अनोखे तरीके से विरोध जताते हुए कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। हालात कुछ समय के लिए ऐसे बने कि सड़कों पर राजनीतिक टकराव और गुस्से का माहौल साफ दिखाई देने लगा।
उत्तराखंड में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की कमी को लेकर विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की जिंदगी मुश्किल कर दी है। रसोई गैस, जो हर घर की जरूरत है, अब आम परिवारों के लिए भारी पड़ने लगी है। इसके साथ ही गैस की सप्लाई में कमी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
राज्य के कई प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। रामनगर, नैनीताल, ऋषिकेश और देहरादून समेत कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने रैलियां निकालकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। सड़कों पर जुटे लोगों ने गैस की बढ़ती कीमतों को वापस लेने और सिलेंडर की किल्लत खत्म करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कई तरह के नारे लगाए गए, जिनमें सरकार की नीतियों पर तीखा हमला किया गया। कार्यकर्ताओं ने “सदन से नरेंद्र गायब, किचन से सिलेंडर गायब” और “गैस की बढ़ी हुई कीमतें वापस लो” जैसे नारे लगाए। इसके अलावा “नहीं चाहिए हमें अच्छे दिन, हमें लौटा दो हमारे पुराने दिन” और “तानाशाही सरकार नहीं चलेगी” जैसे नारे भी लगातार लगाए जाते रहे।
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प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विरोध जताने का एक अलग तरीका भी अपनाया। प्रधानमंत्री के गैस बनाने के कथित फार्मूले का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने गैस पाइप को नाले में डालकर चाय बनाने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि सरकार की नीतियां जमीन पर काम नहीं कर रहीं और आम लोगों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।