नैनीताल में निजी स्कूलों की फीस, किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर डीएम ललित मोहन रयाल ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। एनसीईआरटी किताबें, पारदर्शी फीस बढ़ोतरी और यूनिफॉर्म पर रोक जैसे नियम लागू होंगे।

निजी स्कूलों के लिए सख्त गाइडलाइन (Img- Internet)
Nainital: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में निजी स्कूलों द्वारा फीस, किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कड़ा रुख अपनाया है। अभिभावकों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए डीएम ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि शिक्षा को कमाई का साधन बनाने की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जाएगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत शिक्षा को परोपकार से जुड़ी गतिविधि माना गया है, न कि व्यवसाय। ऐसे में किसी भी निजी स्कूल को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने या अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की छूट नहीं दी जा सकती।
डीएम रयाल ने सख्त शब्दों में कहा कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या प्रकाशन से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। ऐसा करना अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है, जिस पर तत्काल रोक लगाई जाएगी।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी निजी स्कूलों में एनसीईआरटी और एससीईआरटी की पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए। महंगी और अनावश्यक पुस्तकों को थोपने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जाएगा।
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डीएम ने स्पष्ट किया कि फीस में बढ़ोतरी तभी की जा सकेगी जब वह पारदर्शी, तर्कसंगत और अभिभावक व स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के बीच संवाद के बाद तय की गई हो। बिना ठोस कारण और एसएमसी से परामर्श के कोई भी स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकेगा।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि कक्षा एक में वही बच्चे प्रवेश के पात्र होंगे जिनकी उम्र शैक्षणिक सत्र की शुरुआत तक, यानी एक अप्रैल तक, छह वर्ष पूरी हो चुकी हो। इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
डीएम ललित मोहन रयाल
डीएम रयाल ने मुख्य शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखी जाए। स्कूलों को फीस वृद्धि का औचित्य और पिछले वर्षों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
यूनिफॉर्म को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। स्कूल ऐसी यूनिफॉर्म निर्धारित करेंगे जिसका कपड़ा और रंग आम बाजार में आसानी से उपलब्ध हो। बार-बार यूनिफॉर्म बदलने की अनुमति नहीं होगी, ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
जिलाधिकारी ने कॉपियों पर विद्यालय का लोगो लगाने पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं, जिससे अभिभावकों को अनावश्यक खर्च न उठाना पड़े।
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पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर निजी स्कूल को अपनी फीस सूची, यूनिफॉर्म पैटर्न और पुस्तक सूची नोटिस बोर्ड और स्कूल की वेबसाइट (यदि उपलब्ध हो) पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। तय शुल्क के अलावा किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वसूली पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि मुख्य शिक्षाधिकारी और जिला शिक्षाधिकारी द्वारा गठित जांच टीम जिले के सभी निजी स्कूलों का निरीक्षण करेगी और अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।