देवभूमि हरिद्वार में साधु-संतों की व्यवस्था और अखाड़ों की मर्यादा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जहां RSS के बड़े महात्मा महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने प्रेस वार्ता कर जूना अखाड़ा के महामंत्री हरी गिरी और उनके तीन सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

जूना अखाड़ा के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप
Haridwar: देवभूमि हरिद्वार में साधु-संतों की व्यवस्था और अखाड़ों की मर्यादा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जहां RSS के बड़े महात्मा महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने प्रेस वार्ता कर जूना अखाड़ा के महामंत्री हरी गिरी और उनके तीन सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
हरिद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता में स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने जूना अखाड़े द्वारा किए गए अपने निष्कासन पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अखाड़े की ओर से लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार, दुर्भावनापूर्ण और द्वेष भावना से प्रेरित हैं।
स्वामी प्रबोधानंद गिरि का दावा है कि उन्होंने कभी जूना अखाड़े में नागा दीक्षा या औपचारिक सदस्यता नहीं ली, इसलिए निष्कासन का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने आरोप लगाया कि अखाड़े के कुछ पदाधिकारी साधु-संतों की मर्यादा के विपरीत गतिविधियों में लिप्त हैं, जिससे सनातन परंपरा और अखाड़ों की गरिमा प्रभावित हो रही है।
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उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने इन कथित अव्यवस्थाओं और अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाई तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने केंद्र और राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) March 15, 2026
इस बयान के बाद संत समाज में चिंतन और मंथन की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। कई साधु-संतों का मानना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो अखाड़ों की व्यवस्थाओं को पारदर्शी और अनुशासित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
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इस प्रेस वार्ता में बड़ी संख्या में पत्रकारों के साथ साधु-संत और धर्माचार्य भी मौजूद रहे। फिलहाल अब देखना होगा कि इन आरोपों के बाद अखाड़ा परिषद और संबंधित पक्ष क्या प्रतिक्रिया देते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है।