आजादी की लड़ाई के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों का दौरा किया और यहां के लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उनकी पहली यात्रा 1929 में हुई, जब उन्होंने अहमदाबाद से 11 जून को हल्द्वानी के लिए प्रस्थान किया।

गांधी आश्रम (Img: Dynamite News)
Nainital: आजादी की लड़ाई के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों का दौरा किया और यहां के लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उनकी पहली यात्रा 1929 में हुई, जब उन्होंने अहमदाबाद से 11 जून को हल्द्वानी के लिए प्रस्थान किया। 14 जून को महात्मा गांधी हल्द्वानी पहुंचे और उसी दिन काठगोदाम-नैनीताल मार्ग पर स्थित ताकुला गांव में ठहरे। इस गांव की शांत वादियों और प्राकृतिक सुंदरता से प्रभावित होकर उन्होंने यहां गांधी आश्रम की नींव रखी।
15 जून को महात्मा गांधी नैनीताल पहुंचे और स्थानीय लोगों से स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उनका यह संदेश केवल नैनीताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भवाली, रानीखेत, अल्मोड़ा और बागेश्वर तक फैला। इस दौरान गांधी जी ने लोगों को अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनकी सरल जीवनशैली और विचारों ने पहाड़ी जनता पर गहरा असर डाला।
जानकारी के मुताबिक, 1931 में गांधी जी दूसरी बार कुमाऊं आए और कुछ दिन तक ताकुला आश्रम में रुके। इतिहासकारों के अनुसार, 1929 में उन्होंने ताकुला गांव में गांधी मंदिर की नींव स्वयं रखी और इसके बनने के बाद भी वहां प्रवास किया। यह स्थल आज भी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
महात्मा गांधी की यात्राओं ने नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में आजादी के लिए दृढ़ संकल्प पैदा किया। उनकी उपस्थिति और मार्गदर्शन ने पहाड़ी जनता को स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी देने के लिए नई चेतना दी। आज भी ताकुला गांधी आश्रम और गांधी मंदिर यहां की धरती पर गांधी जी की यादों और उनके विचारों का प्रतीक बने हुए हैं।
कुमाऊं, भारत के राज्य उत्तराखंड का एक प्रमुख प्रशासनिक और राजस्व मंडल है। यह राज्य के पूर्वी भाग में स्थित है। इसके उत्तर में तिब्बत, पूर्व में नेपाल, दक्षिण में उत्तर प्रदेश और पश्चिम में गढ़वाल मंडल स्थित है। नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर और उधम सिंह नगर इसके छह मुख्य जिले हैं।