नैनीताल के चर्चित दीक्षा हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने इमरान उर्फ ऋषभ तिवारी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। पहचान छिपाकर लिव-इन में रह रहे आरोपी ने झगड़े के दौरान महिला की हत्या कर दी थी। कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए हैं।

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Nainital: नैनीताल की वादियों में हुआ एक खौफनाक कत्ल आखिरकार कानून की पकड़ में आ गया। जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश प्रशांत जोशी की अदालत ने उस सनसनीखेज हत्याकांड में फैसला सुनाते हुए आरोपी इमरान उर्फ ऋषभ तिवारी को उम्रकैद की सजा दे दी, जिसने कुछ साल पहले पूरे शहर को झकझोर दिया था। कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे न देने पर एक साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। फैसला सुनते ही आरोपी को फिर से जेल भेज दिया गया।
पहचान छिपाकर बनाया रिश्ता, फिर हुआ खून
सरकारी वकील सुशील कुमार शर्मा के मुताबिक 14 अगस्त 2021 को गाजियाबाद निवासी इमरान खुद को ऋषभ तिवारी बताकर दीक्षा और उसकी दो सहेलियों के साथ घूमने नैनीताल आया था। मल्लीताल के होटल गैलेक्सी में दो कमरे लिए गए एक में दीक्षा और इमरान ठहरे, जबकि दूसरी सहेलियां अलग कमरे में थी।
दो दिन बाद जब दीक्षा फोन नहीं उठा रही थी तो सहेलियां कमरे तक पहुंची। दरवाजा नहीं खुला तो स्टाफ की मदद से अंदर गए और बिस्तर पर दीक्षा का शव देखकर सबके होश उड़ गए। आरोपी फरार था और फोन भी बंद मिला। जांच में सामने आया कि मोबाइल पर आए एक पुराने परिचित के मैसेज को लेकर दोनों में जोरदार झगड़ा हुआ और गुस्से में इमरान ने उसकी सांसें रोककर हत्या कर दी।
पहले से चल रहा था विवाद, कोर्ट में 17 गवाह पेश
जांच में यह भी पता चला कि इमरान प्रॉपर्टी का काम करता था और वहीं उसकी मुलाकात दीक्षा से हुई थी। दीक्षा की सोसाइटी में ज्यादातर हिन्दू परिवार होने के कारण उसने अपनी असली पहचान छिपाकर ऋषभ तिवारी नाम अपनाया था। दीक्षा तलाकशुदा थी और पहले भी लिव-इन में रह चुकी थी। पुराने साथी से बातचीत को लेकर दोनों के बीच पहले भी कई बार विवाद हुआ था।
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 17 गवाह पेश किए। सबूतों और बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और कठोर सजा सुनाई। साथ ही उत्तराखंड अपराध पीड़ित सहायता योजना 2013 के तहत मृतका के माता-पिता को आर्थिक मदद देने का आदेश भी दिया गया।