नैनीताल स्थित कैंची धाम में हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और इनमें सबसे बड़ी संख्या युवाओं की है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार के साथ नेपाल और नीदरलैंड से भी भक्त बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन को आ रहे हैं। अध्ययन में सामने आया कि अधिकतर श्रद्धालु सिर्फ आध्यात्मिक उद्देश्य से धाम पहुंचते हैं, जबकि सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है।

Kainchi Dham में आस्था की बाढ़
Nainital: नैनीताल का कैंची धाम आज सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का ऐसा केंद्र बन चुका है, जहाँ रोज़ सैकड़ों लोग बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन करने पहुंचते हैं। इस जगह की खास बात यह है कि यहां आने वालों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। 15 से 30 साल तक की उम्र वाले जेन-जी भक्त बड़ी तेजी से इस धाम की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
धाम में आने वाले श्रद्धालुओं में सबसे अधिक लोग उत्तर प्रदेश से आते हैं। इसके बाद दिल्ली और बिहार का नंबर आता है। विदेशों में भी बाबा के प्रति आस्था लगातार बढ़ रही है। नेपाल से लेकर नीदरलैंड तक के भक्त यहाँ दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां आने वाले करीब 95 प्रतिशत लोग सिर्फ आध्यात्मिक शांति और दर्शन के उद्देश्य से ही आते हैं।
अर्थ एवं संख्या विभाग ने पर्यटन विभाग के सहयोग से अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2025 में तीन हजार श्रद्धालुओं पर अध्ययन किया। इस अध्ययन में सामने आया कि लगभग 73 प्रतिशत लोग केवल कैंची धाम तक ही सीमित रहे, जबकि बाकी लोग नैनीताल, भवाली, भीमताल, मुक्तेश्वर, अल्मोड़ा, कौसानी, जागेश्वर और रानीखेत जैसे दूसरे पर्यटन स्थलों पर भी गए।
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सर्वे में यह भी सामने आया है कि ज्यादातर श्रद्धालु एक ही दिन में दर्शन कर वापस लौट जाते हैं। करीब 64 प्रतिशत लोग उसी दिन घर लौट गए, जबकि केवल 22 प्रतिशत ही होटल या होमस्टे में ठहरे। आँकड़ों के मुताबिक, 82 प्रतिशत से ज्यादा श्रद्धालु उत्तराखंड के बाहर के राज्यों से पहुंचे और लगभग 17 प्रतिशत स्थानीय लोग थे। इनमें सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश की 29 प्रतिशत रही। दिल्ली से 13 प्रतिशत और बिहार से करीब 11 प्रतिशत भक्त आए। विदेश से आने वाले श्रद्धालु बहुत कम रहे, जो नेपाल और नीदरलैंड से पहुंचे थे।
सुविधा संबंधी समस्याएं अभी भी बनी : सर्वे में कई खामियाँ भी सामने आईं। 74 प्रतिशत लोगों ने पार्किंग की अव्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। लगभग 58 प्रतिशत श्रद्धालु शौचालय और स्वच्छता सुविधाओं से संतुष्ट नहीं थे। करीब 54 प्रतिशत ने कचरा प्रबंधन को लेकर असंतोष जताया और 52 प्रतिशत लोगों ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएँ पर्याप्त नहीं हैं। साफ-सफाई को लेकर भी 24 प्रतिशत लोग असंतुष्ट दिखे।
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दर्शन का उद्देश्य सिर्फ आध्यात्मिक : सर्वे में यह साफ दिखा कि 95 प्रतिशत से ज्यादा लोग सिर्फ आध्यात्मिक उद्देश्य से कैंची धाम पहुंचे। इनमें से करीब 40 प्रतिशत दूसरी बार दर्शन के लिए आए थे। लगभग सभी श्रद्धालुओं ने एक घंटे से कम समय में दर्शन कर लिए। धाम में सबसे ज्यादा भीड़ सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच रहती है।