मुजफ्फरनगर में महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती के “तोप का लाइसेंस” संबंधी बयान से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। बयान के बाद कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है।

यति नरसिंहानंद
Muzaffarnagar: महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती के एक बयान ने पश्चिमी यूपी की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। रविवार को मुजफ्फरनगर पहुंचे यति नरसिंहानंद ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्हें अपने मंदिर की सुरक्षा के लिए तोप का लाइसेंस चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के नवरात्रों के दौरान उनके मंदिर पर बड़े पैमाने पर हमला हुआ था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है।
मुजफ्फरनगर में दिए बयान, सरकार पर साधा निशाना
यति नरसिंहानंद ने कहा कि मौजूदा हालात में हिंदू समाज को आत्मरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार को हिंदुओं ने वोट दिया, लेकिन सरकार अपने ही समर्थकों को शस्त्र लाइसेंस देने में सख्ती बरत रही है। उनके मुताबिक बजरंग दल जैसे संगठनों से सुरक्षा नहीं हो पाएगी और संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पर लाइसेंस जारी करने का दबाव बनाया जाना चाहिए।
हरिद्वार जाते वक्त रोके जाने के बाद दिया बयान
दरअसल यति नरसिंहानंद यूजीसी कानून के विरोध में हरिद्वार गंगा किनारे प्रदर्शन के लिए जा रहे थे, लेकिन यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर पर उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें रोककर वापस कर दिया। इसके बाद वे मुजफ्फरनगर पहुंचे, जहां शिव चौक पर रुकने की कोशिश के दौरान पुलिस ने उन्हें वहां से हटाया। गाजियाबाद लौटते समय एक रेस्टोरेंट में आयोजित व्यापार संगठन के कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने मीडिया से बातचीत की।
मंदिर पर हमले का दावा, पुलिस रिकॉर्ड पर सवाल
यति नरसिंहानंद ने अपने बयान में कहा कि उनके मंदिर की सुरक्षा खतरे में है और इसी कारण वे अधिक कड़े सुरक्षा इंतजाम चाहते हैं। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि ऐसे दावों की पुष्टि के लिए पुलिस रिकॉर्ड और जांच जरूरी होती है। फिलहाल इस मामले में किसी आधिकारिक पुष्टि या एफआईआर का विवरण सामने नहीं आया है।
बयान पर बढ़ सकता है सियासी ताप
उनके बयान के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं आना तय मानी जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि इस तरह के बयान कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं और प्रशासन की भूमिका पर भी दबाव बढ़ाते हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।