
नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और डीएम मेधा रूपम (सोर्स: सोशल मीडिया)
Noida News: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सोमवार को भड़की हिंसा अब सिर्फ मजदूरों के गुस्से की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश की आशंका जताई जा रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आगजनी और तोड़फोड़ करने वाले कई लोग असली कर्मचारी नहीं थे, बल्कि भीड़ में शामिल बाहरी उपद्रवी थे, जिन्होंने हालात को जानबूझकर बिगाड़ा।
गौतमबुद्धनगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि पूरा मामला एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। उनके मुताबिक, जब प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बातचीत के बाद हालात शांत हो चुके थे, तभी अचानक कुछ समूह सामने आए और उन्होंने हिंसा शुरू कर दी। ये लोग आसपास के गांवों से आए थे और इनका मकसद माहौल को बिगाड़ना था।
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन को उग्र बनाने के लिए रातों-रात कई व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए। QR कोड के जरिए कर्मचारियों को इन ग्रुप्स से जोड़ा गया और उन्हें हिंसा के लिए उकसाया गया। पुलिस का मानना है कि यह पूरी कार्रवाई बेहद संगठित तरीके से की गई थी, ताकि आंदोलन को भटका कर हिंसक बनाया जा सके।
पुलिस ने अब तक 200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इनमें असली कर्मचारी कितने हैं और बाहरी लोग कितने। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन से संगठन या समूह सक्रिय थे।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले चार दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन का कोई स्पष्ट नेता नहीं था। अलग-अलग कंपनियों के कर्मचारी इकट्ठा होते और भीड़ बढ़ती जाती। यही स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर हो गई। बातचीत के दौरान भी कई कर्मचारियों ने खुद को नेता मानने से इनकार कर दिया था।
राज्य सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों पर पहले ही सहमति बन गई थी। हालांकि कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि इस सहमति में उद्योग मालिकों की भागीदारी नहीं थी, इसलिए यह अधूरी थी। मजदूरों का कहना है कि जब तक न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और कार्य घंटों जैसे मुद्दों पर ठोस फैसला नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें 10 से 12 हजार रुपए महीने में 12 घंटे तक काम कराया जाता है। ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता और काम का दबाव अलग रहता है। महंगाई के दौर में इतनी कम सैलरी में गुजारा मुश्किल हो रहा है, जिससे उनका गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि श्रमिकों को सम्मानजनक वेतन मिले और औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाए। हाई लेवल कमेटी जांच में जुटी है और जल्द रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
Location : Noida
Published : 14 April 2026, 8:35 AM IST