
डॉ. मंगला कपूर फोटो सोर्स-Google
लखनऊ: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत विभाग की पूर्व प्रोफेसर डॉ. मंगला कपूर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका, शिक्षाविद और एसिड अटैक सर्वाइवर हैं। महज 12 वर्ष की उम्र में हुए जानलेवा एसिड हमले और उसके बाद 36 सर्जरी के असहनीय दर्द को झेलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शिक्षा और संगीत को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
नई पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने का कार्य
डॉ. मंगला कपूर ने बीएचयू से स्नातक, परास्नातक और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। बाद में वे उसी विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में प्रोफेसर बनीं और करीब तीन दशकों तक संगीत शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ग्वालियर घराने से जुड़ीं डॉ. मंगला कपूर शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित शिक्षिका मानी जाती हैं। वर्ष 2019 में सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका संगीत और शिक्षा के प्रति समर्पण जारी है। वह आज भी नि:शुल्क संगीत शिक्षा देकर नई पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित
डॉ. मंगला कपूर को संगीत में योगदान के लिए उन्हे 1982 में तरंग संस्था की ओर से काशी की लता और राज्यसभा की ओर से रोल मॉडल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके संघर्ष, साहस और कला- शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हे प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।
12 साल की थी जब उन पर तेजाब फेंका गया
प्रो. मंगला कपूर ने अपने जीवन यात्रा के बारे में बताया कि 12 साल की थी जब उन पर तेजाब फेंका गया, जिसमें उनकी कोई गलती नहीं थी। बिजनेस की रंजिश में प्रतिद्वंदियों के इशारे पर उनके नौकर ने उन पर तेजाब फेंका था। आज भी वह घटना याद करके उनके आखों में आंसू आ जा जाते हैं। शरीर मे सिरहन होने लगती है, छह साल तक इलाज चला। उनके लिए 6 साल घुटन, अवसाद और कुढ़न में बीतने को मजबूर थे। डॉ. मंगला कपूर के जीवन पर आधारित "मंगला" नाम की एक मराठी फिल्म भी बनी है।
Location : New Delhi
Published : 25 May 2026, 7:31 PM IST
Topics : Acid survivor Dr. Mangala Kapoor Padma Shri UP News