काशी में गंगा नदी पर नाव में इफ्तार करने वाले मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी के बाद सियासत तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं और इसे भेदभावपूर्ण बताया है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव (फोटो सोर्स गूगल)
Lucknow: काशी की गंगा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गई है। नाव पर रोज़ा इफ्तार करने वाले मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। सवाल सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि मंशा और संदेश का भी उठ रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई पर तीखा हमला बोला है और इसे समाज में दूरी पैदा करने की कोशिश करार दिया है।
बनारस में 16 मार्च को गंगा नदी में नाव पर कुछ मुस्लिम युवकों ने रोज़ा इफ्तार किया था। इस दौरान बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए FIR दर्ज की और 14 युवकों को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि सीधे-सीधे राजनीतिक बहस में बदल गया।
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लखनऊ में एक इफ्तार पार्टी के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार और प्रशासन पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि क्या गंगा में इफ्तार करना अपराध है? उनके मुताबिक, प्रशासन को कार्रवाई करने के बजाय युवकों को इफ्तारी देनी चाहिए थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हथेली गरम होती तो पुलिस नरम हो जाती, यानी अगर रिश्वत दी जाती तो शायद यह कार्रवाई नहीं होती।
अखिलेश यादव ने इस मामले की तुलना एक 5-स्टार जहाज से की। उन्होंने कहा कि गंगा में चलने वाले उस जहाज पर महंगी शराब परोसी जाती है और उसका गंदा पानी भी गंगा में जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि उस जहाज के मालिक के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? अगर पर्यावरण और नियमों की बात है तो वहां सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई?