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विधानसभा चुनाव
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ युवाओं की उम्मीदें और रोजगार से जुड़े सवाल भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहेंगे। किसी युवा के लिए सरकारी नौकरी जीवन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, तो कोई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा है। वहीं, कुछ युवा निजी क्षेत्र में रोजगार, तकनीकी कौशल और अपना कारोबार शुरू करने के अवसर तलाश रहे हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल है कि यूपी का युवा वोटर आखिर चाहता क्या है,स्थायी सरकारी नौकरी, समय पर भर्ती परीक्षाएं और परिणाम या फिर ऐसा आर्थिक माहौल जिसमें वह अपना कारोबार खड़ा कर सके? इस सवाल का जवाब केवल राजनीतिक भाषणों या सोशल मीडिया पर चल रही बहस से नहीं मिल सकता। इसके लिए शहरों, कस्बों और गांवों में युवाओं की वास्तविक समस्याओं, रोजगार के अवसरों और सरकारी योजनाओं के अनुभवों को समझना होगा।
युवाओं की रोजगार संबंधी स्थिति को समझने के लिए केंद्र सरकार का आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) एक महत्वपूर्ण स्रोत है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के संसद में दिए गए जवाब के अनुसार उत्तर प्रदेश में 15–29 वर्ष के युवाओं का Worker Population Ratio यानी काम करने वाली आबादी का अनुपात 2021–22 में 34.7 प्रतिशत, 2022–23 में 38.5 प्रतिशत और 2023–24 में 39 प्रतिशत दर्ज किया गया था।
इस आंकड़े को बेरोजगारी दर नहीं समझना चाहिए। यह बताता है कि संबंधित आयु वर्ग की आबादी में कितने लोग काम कर रहे थे। साथ ही, जनवरी 2025 से PLFS की सर्वेक्षण पद्धति में बदलाव किया गया है, इसलिए अलग-अलग वर्षों के आंकड़ों की तुलना करते समय पद्धति का ध्यान रखना जरूरी है।
इन आंकड़ों के साथ एक और सवाल महत्वपूर्ण है-युवाओं को किस तरह का काम मिल रहा है? क्या वह उनकी शिक्षा और कौशल के अनुरूप है? क्या आमदनी इतनी है कि वे अपने परिवार का खर्च उठा सकें? और क्या उन्हें अपने जिले में ही रोजगार मिल पा रहा है, या नौकरी के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है?
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भर्ती का विज्ञापन, आवेदन, परीक्षा, परिणाम, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति तक की पूरी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। किसी भर्ती में पदों की संख्या घोषित होना और अभ्यर्थियों को वास्तव में नियुक्ति मिलना दो अलग-अलग चरण हैं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भर्ती विज्ञापन, प्रवेश पत्र, परीक्षा परिणाम और दस्तावेज सत्यापन से जुड़ी सूचनाएं जारी होती हैं।
2027 के चुनाव से पहले में यह जांचना जरूरी होगा कि अभ्यर्थियों को किन भर्तियों में देरी का सामना करना पड़ा, कितने पदों पर प्रक्रिया पूरी हुई और नियुक्ति पत्र मिलने तक उम्मीदवारों को किन कठिनाइयों से गुजरना पड़ा। परीक्षा में पारदर्शिता, समयबद्ध कैलेंडर और शिकायतों के निस्तारण पर युवाओं की राय भी इस पड़ताल का अहम हिस्सा हो सकती है। क्या निजी नौकरी सरकारी नौकरी का विकल्प बन सकती है?
हर युवा सरकारी नौकरी की तैयारी नहीं करना चाहता। निजी कंपनियों, विनिर्माण इकाइयों, सेवा क्षेत्र, आईटी, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय उद्योगों में रोजगार भी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण विकल्प हैं लेकिन निजी नौकरी का आकलन केवल नियुक्तियों की संख्या से नहीं होना चाहिए। शुरुआती वेतन, नौकरी की स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा, काम के घंटे, कौशल प्रशिक्षण और पदोन्नति की संभावनाएं भी मायने रखती हैं।
यूपी के औद्योगिक क्षेत्रों और छोटे शहरों में यह पड़ताल की जा सकती है कि स्थानीय कंपनियां कितने युवाओं को रोजगार दे रही हैं, उन्हें किन कौशलों की जरूरत है और स्थानीय शिक्षण संस्थानों से निकलने वाले युवाओं को काम पाने में कहां कठिनाई होती है।
डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन कारोबार, कृषि आधारित उद्यम, खाद्य प्रसंस्करण, मरम्मत सेवाओं और छोटे विनिर्माण कारोबार में भी युवाओं के लिए अवसर हो सकते हैं। हालांकि, कारोबार शुरू करने की इच्छा और उसे सफलतापूर्वक चलाने की क्षमता के बीच पूंजी, बाजार, प्रशिक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं जैसी चुनौतियां आती हैं।
दरअसल उन युवाओं से बातचीत होनी चाहिए जिन्होंने अपना काम शुरू किया है। उनसे यह जानना जरूरी होगा कि उन्हें ऋण मिला या नहीं, ग्राहकों तक पहुंच कैसे बनी, कारोबार चलाने में क्या खर्च आता है और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किन अड़चनों का सामना करना पड़ा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि युवा नौकरी की तलाश में रहना चाहते हैं या उन्हें अपना कारोबार खड़ा करने के लिए व्यावहारिक सहायता की जरूरत है।
यूपी के युवा वर्ग को एक समान समूह मानना सही नहीं होगा। ग्रामीण युवाओं, शहरी अभ्यर्थियों, तकनीकी शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों और पढ़ाई पूरी कर चुकी महिलाओं की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं।
महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों के साथ सुरक्षित आवागमन, कार्यस्थल की सुरक्षा, प्रशिक्षण केंद्रों तक पहुंच और परिवार की जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, परिवहन, प्रशिक्षण और स्थानीय उद्योगों की उपलब्धता अवसरों को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए 2027 से पहले युवाओं के मुद्दों की पड़ताल में लड़के और लड़कियों, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तथा अलग-अलग शिक्षा स्तरों के युवाओं की आवाज शामिल करना जरूरी होगा।
Location : Lucknow
Published : 20 October 2026, 5:48 PM IST