
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में प्रभावी मौसम तंत्र के अभाव के कारण एक बार फिर गर्मी का प्रकोप बढ़ने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी चार दिनों के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में लू की स्थिति बन सकती है। शुक्रवार को 45 जिलों में अधिकतम तापमान बढ़ने और लू चलने की संभावना है। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी या छिटपुट वर्षा के भी आसार बने हुए हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि गर्म हवाओं की रफ्तार 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
मौसम विभाग ने बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, गाजीपुर, आजमगढ़, जौनपुर, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर और अयोध्या समेत कुल 45 जिलों में लू चलने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रह सकता है। बढ़ते तापमान के कारण लोगों को दिन के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
प्रदेश में गर्मी का असर लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को प्रयागराज 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला दर्ज किया गया। कई अन्य जिलों में भी तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा, जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा।
लगातार बढ़ते तापमान और भीषण हीट वेव की परिस्थितियों के बीच बांदा में 48 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज होने के कारणों की वैज्ञानिक पड़ताल शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी अमित आसेरी के अनुरोध पर शासन स्तर से छह वैज्ञानिकों की विशेष टीम गुरुवार को बांदा पहुंची। यह टीम आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीक, उपग्रह चित्रों और विभिन्न वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर तापमान वृद्धि के कारणों का विस्तृत अध्ययन करेगी।
परियोजना वैज्ञानिक डॉ हफीजुल्लाह और अभिषेक गोंड जिले में रहकर अध्ययन कार्य कर रहे हैं। खनन विभाग को भी वैज्ञानिकों के सहयोग के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा जिले के अत्यधिक गर्म क्षेत्रों यानी हॉटस्पॉट्स का मानचित्रण भी किया जाएगा।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार वैज्ञानिक भूमि सतह तापमान (लैंड सरफेस टेम्परेचर) का विश्लेषण कर उन क्षेत्रों की पहचान करेंगे जहां सबसे अधिक तापमान दर्ज हो रहा है। अध्ययन के दौरान हरियाली और वन क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। विशेषज्ञ यह जांचेंगे कि वृक्षों की संख्या में कमी और हरित आवरण में हुए बदलाव का तापमान वृद्धि पर कितना प्रभाव पड़ा है।
इसके साथ ही बुंदेलखंड की चट्टानी भूमि, कम आर्द्रता, खुले भूभाग और गर्म हवाओं की दिशा व प्रवाह जैसे भौगोलिक कारकों का अध्ययन किया जाएगा। सड़कों, कंक्रीट संरचनाओं, निर्माण गतिविधियों और धूल प्रदूषण से पैदा होने वाले ‘हीट आइलैंड प्रभाव’ की भी जांच की जाएगी, ताकि तापमान में असामान्य वृद्धि के कारणों का वैज्ञानिक आधार पर पता लगाया जा सके।
Location : Lucknow
Published : 19 June 2026, 8:05 AM IST