सुल्तानपुर में बारिश और आंधी से भारी तबाही, फसलें खराब और 1070 बिजली खंभे टूटे; क्या किसानों को मिल पाएगा उचित मुआवजा?

सितंबर के अंत में लगातार तीन दिन हुई भारी बारिश और तेज हवा ने सुल्तानपुर में भारी तबाही मचाई है। करीब 30 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई, 42 से ज्यादा कच्चे मकान गिर गए और 1070 बिजली खंभे टूटने से पांच लाख की आबादी प्रभावित हुई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 28 September 2026, 12:05 PM IST

Sultanpur: सितंबर के आखिरी दिनों में लगातार तीन दिन हुई बारिश और तेज हवा ने सुल्तानपुर में तबाही के निशान छोड़ दिए। खेतों में पककर तैयार धान की फसल धराशायी हो गई, गन्ना, अरहर, उड़द और मक्का प्रभावित हुए। कच्चे मकान गिरे तो पेड़ों के साथ बिजली के खंभे और तार भी टूटकर बिखर गए। गांवों में जलभराव और अंधेरे ने मुश्किलें बढ़ा दीं।

प्रारंभिक सरकारी आकलन में करीब 30 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है, जिसमें लगभग 28 हजार हेक्टेयर धान है। कृषि विभाग ने जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह के निर्देश पर नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है।

खेतों में बिछ गई उम्मीद की फसल

बारिश और तेज हवा ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। पककर तैयार धान खेतों में बिछ गया। गन्ने की फसल भी कई जगह जमीन पर गिर गई। अब किसानों को उत्पादन घटने के साथ दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने की चिंता सता रही है। जासापारा के किसान रवींद्र सिंह ने बताया कि बेटे की उच्च शिक्षा की उम्मीद में गन्ने की खेती की थी, लेकिन बारिश और हवा ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया।

42 से अधिक मकान गिरे, छत का संकट

बारिश ने कई परिवारों से उनकी छत भी छीन ली। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में 42 से अधिक मकान गिर चुके हैं। भदैया समेत कई क्षेत्रों में कच्चे मकानों के गिरने की घटनाएं सामने आईं। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह के अनुसार प्रभावित परिवारों का सर्वे कराया जा रहा है और नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए भी टीमें काम कर रही हैं।

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1070 खंभे टूटे, पांच लाख आबादी प्रभावित

बारिश और तेज हवा से बिजली व्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा। जिले में करीब 1070 बिजली खंभे क्षतिग्रस्त हुए। रविवार तक 355 खंभों की मरम्मत कराई जा चुकी थी। 197 प्रभावित 11 केवी फीडरों में 159 की आपूर्ति बहाल हुई। 89 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें शेष 43 में से 24 बदले गए। आपूर्ति बहाली के लिए करीब 460 कर्मचारी लगाए गए।

कई इलाकों में 36 से 72 घंटे तक बिजली संकट बना रहा। कादीपुर फीडर नंबर दो से जुड़े गांवों में करीब 50 घंटे, जयसिंहपुर क्षेत्र के कई गांवों में 72 घंटे और धनपतगंज के करीब 30 गांवों में 36 घंटे तक आपूर्ति प्रभावित रही।

बिजली गई तो पानी का संकट भी बढ़ा

बिजली आपूर्ति ठप होने से नलकूप और घरेलू मोटर बंद हो गए। पेयजल के लिए लोगों को हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ा। पशुपालकों की परेशानी भी बढ़ी। कई गांवों में रातें मोमबत्ती और ढिबरी के सहारे गुजरीं। धनपतगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का ट्रांसफार्मर खराब होने से वहां भी बिजली संकट पैदा हुआ।

बारिश ने रोकी रोजी-रोटी

इस बारिश की मार केवल खेतों और मकानों तक सीमित नहीं रही। लगातार बारिश से दिहाड़ी मजदूरों का काम बंद रहा, जबकि ठेला-रेहड़ी, फुटपाथ, सब्जी और छोटे दुकानदारों का कारोबार भी लगभग ठप हो गया। रोज कमाकर परिवार चलाने वालों के सामने कुछ दिनों के लिए सीधे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया।

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बारिश थमने के बाद जब धूप निकली तो इन वर्गों के चेहरों पर भी राहत दिखाई दी। काम की तलाश में मजदूर फिर निकले और ठेले-रेहड़ियां सड़कों पर नजर आने लगीं। छोटे दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें संभालीं। बाजारों में धीरे-धीरे रौनक लौटने लगी।

मौसम खुला तो जिंदगी फिर चल पड़ी

तीन दिनों की लगातार बारिश के बाद रविवार को मौसम साफ हुआ। धूप निकलने के साथ लोगों ने राहत की सांस ली। रात में बढ़ी ठंडक के कारण पंखे बंद होने लगे। कई दिनों से रुके जरूरी काम निपटाने के लिए लोग घरों से बाहर निकले। बाजारों, सड़कों और सरकारी कार्यालयों में फिर चहल-पहल दिखाई दी। ग्रामीण इलाकों से लोग जिला मुख्यालय पहुंचे। ऐसा लगा जैसे बारिश से थमी जिंदगी ने फिर धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ ली हो।

सामने है राहत और पुनर्वास की चुनौती

मौसम साफ होने के बाद प्रशासन के सामने अब वास्तविक नुकसान का आकलन कर किसानों और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की चुनौती है। कृषि विभाग फसल क्षति का सर्वे कर रहा है, जबकि बिजली विभाग क्षतिग्रस्त खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त करने में जुटा है।

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तीन दिनों की बारिश ने सुल्तानपुर में किसान की फसल, ग्रामीण की छत, बिजली उपभोक्ता की सुविधा और मजदूर की रोजी-रोटी चारों को प्रभावित किया। मौसम अब साफ है, बाजारों में रौनक लौट रही है और काम-धंधा फिर शुरू हो रहा है, लेकिन खेतों में बिछी फसल, ढहे मकान और क्षतिग्रस्त बिजली ढांचा इस बारिश के छोड़े जख्मों की कहानी अभी लंबे समय तक कहते रहेंगे।

Location :  Sultanpur

Published :  28 September 2026, 12:05 PM IST