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प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest )
Lucknow: उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण कई जिलों में बाढ़ का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश की प्रमुख नदियां गंगा, घाघरा (सरयू), शारदा, राप्ती, रोहिन, क्वानो, यमुना, बेतवा, केन और चंबल का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पानी खतरे के स्तर से ऊपर बह रहा है।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नदी किनारे बसे निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है। बलिया के भोजपुरवा गांव में हालात बिगड़ने के बाद करीब 100 परिवारों ने अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों का रुख कर लिया है। कई गांवों में पानी भरने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो गई है।
बाढ़ से बलिया, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर, हमीरपुर, जालौन, बांदा, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर और मिर्जापुर जिले प्रभावित बताए जा रहे हैं।
कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है। खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है।
नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर में शारदा, राप्ती और घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है।
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गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज और गाजीपुर में नदी किनारे बसे गांवों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। तटबंधों की सुरक्षा के लिए लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। वहीं, बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और राहत टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, नाव और बचाव दल भेजे जाएंगे।
Location : Lucknow
Published : 30 July 2026, 12:26 PM IST