UP Assembly Election: पश्चिमी यूपी में BJP के लिए मुस्लिम वोटों का ‘चक्रव्यूह’! सपा की क्या है रणनीति?

समाजवादी पार्टी पीडीए और कांग्रेस जहां ओबीसी और दलित वोटरों को साधने की कोशिश में जुटी हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 19 August 2026, 11:00 AM IST

Meerut: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जहां ओबीसी और दलित वोटरों को साधने की कोशिश में जुटी हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है।

बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में दो मुस्लिम चेहरों को अहम जिम्मेदारी देकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को संगठन में जगह देकर अशराफ और पसमांदा मुस्लिम समीकरण साधने की रणनीति अपनाई है।

बीजेपी की नई टीम में दो मुस्लिम चेहरों को जगह

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने डॉ. तारिक मंसूर को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। वहीं, कुंवर बासित अली को पदोन्नति देते हुए बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है।

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय संगठन में राज्य को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया है। पार्टी की नई टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें दो मुस्लिम नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिली है।

सपा के PDA वोट बैंक पर बीजेपी की नजर

2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका लगा था। पार्टी की सीटें 2019 के 62 से घटकर 2024 में 33 रह गई थीं। इसके बाद बीजेपी अब 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुट गई है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बीजेपी की नजर समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण में सेंध लगाने पर है। पार्टी मुस्लिम समाज को एकजुट वोट बैंक के रूप में देखने के बजाय उसमें मौजूद जातीय और सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

पसमांदा और मुस्लिम राजपूत समीकरण साधने की कोशिश

डॉ. तारिक मंसूर पसमांदा मुस्लिम समुदाय के कुरैशी समाज से आते हैं। वहीं, कुंवर बासित अली मुस्लिम राजपूत समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। बीजेपी ने इन दोनों नेताओं के जरिए मुस्लिम समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की रणनीति बनाई है।

विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी पसमांदा मुस्लिमों और पिछड़े मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है। बीजेपी लंबे समय से पसमांदा मुस्लिमों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती रही है और अब संगठन में प्रतिनिधित्व देकर इस अभियान को और गति देने की तैयारी में है।

पश्चिमी यूपी में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश

कुंवर बासित अली की जिम्मेदारी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जहां कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते हैं।

बीजेपी की रणनीति है कि मुस्लिम समाज के विभिन्न वर्गों में अपनी पहुंच बनाकर वह विपक्ष के पारंपरिक वोट बैंक में हिस्सेदारी हासिल कर सके। 2027 विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों का बंटवारा बीजेपी के लिए अहम चुनावी फैक्टर साबित हो सकता है।

बीजेपी का बदला हुआ मुस्लिम आउटरीच प्लान

बीजेपी अब मुस्लिम समाज को केवल एक वोट बैंक के तौर पर नहीं देख रही है, बल्कि जातीय और सामाजिक आधार पर अलग-अलग समूहों को साधने की कोशिश कर रही है। तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली की नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

आने वाले विधानसभा चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की यह रणनीति सपा के PDA समीकरण को कितना प्रभावित कर पाती है और मुस्लिम मतदाताओं के बीच पार्टी कितनी पैठ बना पाती है।

Location :  Meerut

Published :  19 August 2026, 11:00 AM IST