सिर्फ 1000 रुपये के लिए तीन देवरों ने भाभी को दी दर्दनाक मौत, अब हत्या के 10 साल बाद आया बड़ा ट्विस्ट

हरदोई के कछौना क्षेत्र में करीब 10 साल पहले एक हजार रुपये की उधारी को लेकर हुए विवाद में महिला की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अदालत ने तीन सगे देवरों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 September 2026, 4:07 PM IST

Hardoi News: महज एक हजार रुपये की उधारी को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक महिला की जान चली गई। दस साल पुराने इस हत्याकांड में अदालत ने अब बड़ा फैसला सुनाया है। कछौना क्षेत्र में महिला रेशमा की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या करने के मामले में अपर जिला जज कोर्ट संख्या-3 कुसुमलता ने 3 सगे देवरों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर 13-13 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

एक हजार रुपये को लेकर हुआ था विवाद

मामला कछौना कोतवाली क्षेत्र के मंडलहिया मजरा गौहानी गांव का है। 2 नवंबर 2016 को श्रीराम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसके भाई पप्पू, नीरज और छोटू उर्फ धीरज अपने पिता रामपाल और एक अन्य व्यक्ति के साथ उसके घर पहुंचे थे। सभी ने उधार दिए गए एक हजार रुपये वापस मांगे। श्रीराम ने रकम लौटाने के लिए 10 दिन का समय मांगा, लेकिन इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। इसी दौरान उसकी पत्नी रेशमा घर से बाहर आई। आरोप है कि आरोपियों ने लाठी-डंडों से उन पर हमला कर दिया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि रेशमा की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस ने अगले दिन आरोपियों को किया गिरफ्तार

घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अगले ही दिन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी ससुर रामपाल की मौत हो गई। वहीं एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। इसके बाद तीन आरोपियों के खिलाफ अदालत में मुकदमे की सुनवाई जारी रही।

पति की गवाही बदली, बेटे ने खोला राज

मुकदमे के दौरान मृतका के पति श्रीराम अपने पहले पुलिस बयान से पलट गए और आरोपियों के पक्ष में गवाही दी। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं पड़ा। मृतका के बेटे मोहित ने अदालत में चश्मदीद गवाह के तौर पर घटना की पुष्टि की और मां के साथ हुई मारपीट की जानकारी अदालत के सामने रखी।

पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट बनी अहम सबूत

मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट भी अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण साबित हुईं। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में छह गवाह पेश किए गए और 16 अभिलेखीय साक्ष्य भी रखे गए। इन साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पप्पू, नीरज और छोटू उर्फ धीरज को हत्या का दोषी माना। कोर्ट ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 13 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। करीब दस साल पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद अब दोषियों को उम्रकैद की सजा भुगतनी होगी।

Location :  Hardoi

Published :  4 September 2026, 4:07 PM IST