राज्य कर विभाग बना ट्रेनिंग सेंटर? जूनियर IAS की बढ़ती तैनाती के खिलाफ अफसरों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग में आईएएस अधिकारियों की बढ़ती तैनाती को लेकर विवाद गहरा गया है। जीएसटी ऑफिसर्स सर्विस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अनुभवी अधिकारियों की अनदेखी से कर प्रशासन प्रभावित हो सकता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 14 July 2026, 2:21 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग में आईएएस अधिकारियों की बढ़ती तैनाती को लेकर विभागीय अधिकारियों का विरोध तेज हो गया है। जीएसटी ऑफिसर्स सर्विस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि विभाग में स्वीकृत पदों से अधिक आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है, जिससे विभागीय सेवा नियमों की अनदेखी हो रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव ने इसकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

कानपुर में नियुक्ति के बाद शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत कानपुर में अपर आयुक्त स्तर पर आईएएस अधिकारी की नियुक्ति के बाद हुई। यहां पहले सैमुअल पाल को तैनात किया गया था। इसके बाद वर्ष 2019 बैच की आईएएस अधिकारी सान्या छाबड़ा को भी अपर आयुक्त का दायित्व सौंपा गया। एसोसिएशन का कहना है कि यह नियुक्ति व्यापार कर सेवा नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

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विभागीय अधिकारियों ने नियमों का दिया हवाला

अधिकारियों के अनुसार, राज्य कर विभाग में अपर आयुक्त ग्रेड-1 के कुल 22 पद स्वीकृत हैं और इन पदों पर नियुक्ति केवल पदोन्नति के माध्यम से विभागीय संवर्ग के अधिकारियों की ही होनी चाहिए। उनका कहना है कि पहले कानपुर और गाजियाबाद जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विभागीय अधिकारी ही शीर्ष पदों पर कार्यरत रहे हैं। ऐसे में बाहरी नियुक्तियों से सेवा नियमों की भावना प्रभावित हो रही है।

आदेश वापस लेने की मांग

जीएसटी ऑफिसर्स सर्विस एसोसिएशन ने नियुक्ति विभाग द्वारा जारी आदेश को निरस्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि फिलहाल राज्य कर विभाग में तीन आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति हो चुकी है और जल्द ही बनारस या आगरा में भी अपर आयुक्त पद पर आईएएस अधिकारी की तैनाती की संभावना है।

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अनुभवी अधिकारियों की अनदेखी का आरोप

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि 20 से 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले अधिकारियों के ऊपर पांच-छह साल के प्रशासनिक अनुभव वाले आईएएस अधिकारियों को जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। उनका मानना है कि राजस्व और कर प्रशासन जैसे तकनीकी विषयों में अनुभव बेहद महत्वपूर्ण होता है।

राजस्व व्यवस्था पर असर की आशंका

अधिकारियों ने कहा कि राज्य कर विभाग प्रदेश के लिए करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने वाला महत्वपूर्ण विभाग है। ऐसे विभाग को नए आईएएस अधिकारियों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कर प्रबंधन और विभागीय व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

Location :  Lucknow

Published :  14 July 2026, 2:21 PM IST