
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और राहुल गांधी (सोर्स- एक्स)
Lucknow: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का पेंच फंसा हुआ है। दोनों दलों के बीच सीटों के तालमेल और फॉर्मूले को लेकर आंतरिक स्तर पर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन जमीनी हकीकत और जीत की संभावनाओं को लेकर दोनों पार्टियों के अपने-अपने दावे हैं।
सपा और कांग्रेस दोनों ने चुनाव से पहले अपने आंतरिक सर्वे कराए हैं। इन सर्वे रिपोर्ट्स के मुताबिक, सपा को 2022 के पिछले परिणामों के मुकाबले काफी अधिक सीटें मिलने की संभावना तो दिख रही है, लेकिन वह अभी भी बहुमत के आंकड़े से दूर है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपनी बढ़ती राजनीतिक ताकत का हवाला देते हुए 100 से ज्यादा सीटों पर जीत की संभावना जताई है। कांग्रेस का तर्क है कि उसे 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले जनसमर्थन के आधार पर सीटें मिलनी चाहिए। इसके साथ ही, पार्टी की मंशा राज्य के हर जिले से कम से कम एक सीट पर चुनाव लड़ने की है ताकि पूरे प्रदेश में पार्टी की सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराई जा सके।
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कांग्रेस इस बार उत्तर प्रदेश में केवल 'छोटे भाई' की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह गठबंधन में अधिक राजनीतिक स्पेस और महत्व चाहती है। हालांकि, समाजवादी पार्टी के लिए इस मांग को सहजता से स्वीकार करना मुश्किल नजर आ रहा है। शुरुआती दौर में सपा का रुख यह था कि कांग्रेस को उतनी ही सीटें दी जाएं जितनी उसने 2022 में अपने अन्य सहयोगियों को दी थीं (जो कि 60 से कम थीं)। लेकिन बदले हुए राजनीतिक हालात और गठबंधन की जरूरतों को देखते हुए अब यह संख्या बढ़कर 75 से 80 के बीच हो सकती है।
सीटों के इस समझौते में सपा ने अपनी रणनीति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने संदेश दिया है कि संभावित प्रत्याशियों के नाम और सीटों की संख्या जल्द तय हो ताकि जातीय समीकरणों को बेहतर ढंग से साधा जा सके।
अपनी जीती सीटों पर खुद लड़ेगी सपा: समाजवादी पार्टी अपनी सभी 111 जीती हुई सीटों पर खुद चुनाव लड़ेगी। पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों में से अधिकांश को क्षेत्र में सक्रिय रहकर दोबारा चुनाव की तैयारी करने के निर्देश दे दिए हैं।
कांग्रेस के लिए रणनीति: कांग्रेस को मुख्य रूप से उन सीटों पर लड़ने का विकल्प दिया जा रहा है जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास हैं। इसके अलावा, जो विधायक पार्टी छोड़कर चले गए हैं, उन्हें हराने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर विशेष चुनावी घेराबंदी की जाएगी।
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सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2024 के लोकसभा चुनाव में 'पीडीए' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) के समीकरण से मिली सफलता को विधानसभा चुनाव में दोहराना है। चूंकि इस बार राजनीतिक माहौल और स्थानीय मुद्दे अलग हैं, इसलिए मतदाता के मिजाज को भांपना भी जरूरी हो गया है।
इसके साथ ही दोनों दल 'जेन जी' (Gen-Z) यानी युवा मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए अलग-अलग मोर्चों पर काम कर रहे हैं। जहां एक तरफ राहुल गांधी युवाओं के बीच पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी युवा वर्ग और महिलाओं का समर्थन जुटाने के लिए अपनी विशेष रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
Location : Lucknow
Published : 15 September 2026, 11:28 AM IST
Topics : Akhilesh Yadav Rahul Gandhi SP Congress Seat Sharing UP Assembly Election 2026 UP Politics 2026