समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सरकार से बड़ा सवाल किया और भाजपा पर तंज कसा।

सपा प्रमुख ने सरकार से पूछा बड़ा सवाल (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Lucknow: भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर विपक्षी दल लगतार सरकार से सवाल पूछ रहे हैं और भाजपा को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। शनिवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सरकार से बड़ा सवाल किया। उन्होंने कहा कि कोई भी डील एकतरफा नहीं होती।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा 'हमारे देश की जनता, भाजपा से कह रही है कि जहाँ तक हमें मालूम है 'डील' एक तरफा नहीं होती है। जनता भाजपा से ये पूछ रही है कि 'जीरो (0) बड़ा या अठारह (18)'? क्या भाजपा की समझौता-गणित में 18=0 होता है'?
उन्होंने आगे भाजपा को घेरते हुए लिखा कि देश के किसानों, दुकानों, उद्योगों को बचाने के लिए, खोखले शब्दों के अलावा भाजपा के पास कोई और सुरक्षा-कवच या संरक्षण-योजना है? भारत के हितों के आत्मसमर्पण की मजबूरी के पीछे छिपा गहरा राज क्या है?
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— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) February 7, 2026
अखिलेश यादव ने आगे लिखा कि क्या ये 'बनी वहाँ, पहुँची यहाँ' जैसा कोई एक पक्षीय मामला है? क्या डील के नाम पर भाजपा सरकार 'डॉटेड लाइन' पर केवल हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य है?
सपा प्रमुख ने लिखा कि देश के किसानों, दुकानदारों और उद्योगपतियों को बचाने के लिए भाजपा के पास खोखले शब्दों के अलावा कोई सुरक्षा कवच या संरक्षण योजना है या नहीं। उनका कहना है कि अगर सरकार ने सुरक्षा और संरक्षण के मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो देश की आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
अखिलेश यादव ने सवाल किया कि भारत के हितों के आत्मसमर्पण के पीछे छिपा गहरा राज़ क्या है और क्या यह डील सिर्फ किसी एक पक्षीय लाभ के लिए बनायी गई है।
सपा प्रमुख ने लिखा कि क्या यह डील 'बनी वहाँ, पहुँची यहाँ' जैसी स्थिति में है, यानी कोई एकतरफा मामला बन गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा सरकार को केवल डॉटेड लाइन पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि देश की जनता और हितों की सुरक्षा खतरे में है।
उनका कहना था कि इस तरह की डील से जनता, किसानों और छोटे उद्योगों के लिए अनिश्चितता बढ़ती है। अखिलेश यादव ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि आखिर डील में भारत के हित सुरक्षित हैं या नहीं।