सोनभद्र में पीएम किसान निधि का बड़ा खुलासा! 14,020 मृतकों और 50 हजार अपात्रों के खातों में जा रही थी किस्त। डीएम ने दिए सख्त कार्रवाई और रिकवरी के निर्देश। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

सोनभद्र: किसान सम्मान निधि घोटाला (source: google)
Sonbhadra: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन में एक बड़ी और चौंकाने वाली अनियमितता सामने आई है। सरकारी स्तर पर चलाए गए सघन सत्यापन अभियान के दौरान विभाग ने पाया कि जिले में हजारों ऐसे लोग योजना का लाभ ले रहे थे जो इसके पात्र ही नहीं हैं।
इस घोटाले की गूंज अब शासन तक पहुँच गई है क्योंकि जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि बड़ी संख्या में मृतक और अपात्र लाभार्थियों के खातों में सरकारी धन भेजा जा रहा था। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन सभी संदिग्ध और अपात्र खातों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है और विस्तृत सूची शासन को भेज दी है।
राजस्व और कृषि विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किए गए डेटा सत्यापन में यह बात निकलकर सामने आई है कि जिले में 14,020 मृतक व्यक्ति भी कागजों पर जीवित रहकर योजना की किस्तों का लाभ ले रहे थे। इतना ही नहीं, कुल 50,740 अपात्र लाभार्थियों को इस प्रक्रिया में चिह्नित किया गया है जो मानकों को पूरा नहीं करते।
जांच की गहराई में जाने पर पता चला कि इस सूची में 9,422 ऐसे मामले हैं जहाँ एक ही लाभार्थी ने डबल रजिस्ट्रेशन करा रखा था, जबकि 591 आयकरदाता भी किसान बनकर इस निधि का फायदा उठा रहे थे। पारिवारिक स्तर पर भी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं, जहाँ 569 मामलों में पति और पत्नी दोनों अलग-अलग किस्तें प्राप्त कर रहे थे, जो कि योजना के नियमों के विरुद्ध है।
इस फर्जीवाड़े का सबसे हैरान करने वाला पहलू उन लोगों की संख्या है जिनके पास कृषि योग्य भूमि ही नहीं है। सत्यापन के दौरान 33,800 ऐसे लोग मिले जो बिना किसी जमीन के लाभार्थी बने बैठे थे। इसके साथ ही 110 नाबालिगों के नाम भी इस सूची में शामिल पाए गए हैं।
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— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) March 22, 2026
वर्तमान में पूरे प्रदेश में चल रहे इस सख्त अभियान के तहत अब इन सभी नामों को डेटाबेस से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन की मंशा है कि केवल वास्तविक और जरूरतमंद किसानों को ही इस सहायता राशि का लाभ मिले, इसलिए तकनीकी खामियों और मानवीय गड़बड़ियों को दूर करने के लिए आधार और राजस्व अभिलेखों का मिलान अनिवार्य कर दिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि जिन किसानों ने अब तक अपनी 'फार्मर रजिस्ट्री' नहीं कराई है, उन्हें अगली किस्त का भुगतान नहीं किया जाएगा। वर्तमान में जिले के लगभग 35 हजार किसानों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, जिसके चलते उनकी किस्तों पर संकट मंडरा रहा है।
जिलाधिकारी ने सभी पात्र किसानों से अपील की है कि वे अपने आधार कार्ड और भू-अभिलेखों के साथ तुरंत पंजीकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी साफ किया कि मृतकों के नाम सूची से हटाए जाने के साथ-साथ अपात्रों से रिकवरी की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके।