Kanpur News: विजयादशमी पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने समझाया शास्त्र-शस्त्र का महत्व, जानिए क्या कहा

कानपुर में विजयादशमी के अवसर पर खत्री समाज की ओर से बिरहाना रोड स्थित खत्री धर्मशाला में शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना शामिल हुए। उन्होंने शास्त्र और शस्त्र के महत्व को बताते हुए कहा कि शास्त्र ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं, जबकि शस्त्र अन्याय के खिलाफ खड़े होकर न्याय की रक्षा करने का प्रतीक हैं।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 20 October 2026, 3:53 PM IST
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Kanpur: देशभर में विजयादशमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर शस्त्र पूजन की प्राचीन परंपरा भी निभाई जाती है, जो साहस, विनम्रता और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के संकल्प का प्रतीक मानी जाती है। इसी क्रम में कानपुर के बिरहाना रोड स्थित खत्री धर्मशाला में खत्री समाज की ओर से शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कार्यक्रम में शिरकत की और विधि-विधान से पूजन किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति में शास्त्र और शस्त्र के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

भारतीय संस्कृति में शास्त्र और शस्त्र दोनों का महत्व

शस्त्र पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सतीश महाना ने कहा कि विजयादशमी भगवान श्रीराम और उनकी सेना की विजय का पर्व है। यह पर्व अहंकार के अंत और न्याय की स्थापना का संदेश देता है। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में शास्त्र और शस्त्र, दोनों का विशेष स्थान है।

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उन्होंने कहा कि शास्त्र मनुष्य को ज्ञान, विवेक और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। वहीं, शस्त्रों का उद्देश्य अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होकर न्याय की रक्षा करना है। दोनों का अपना महत्व है और समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए ज्ञान के साथ साहस भी जरूरी है।

रावण विद्वान था, लेकिन अहंकार बना विनाश का कारण

सतीश महाना ने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि वह एक ज्ञानी और विद्वान था, लेकिन उसके भीतर मौजूद अहंकार उसके विनाश का कारण बना। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम ने रावण के इसी अहंकार का अंत किया था।

विजयादशमी का संदेश केवल एक युद्ध में मिली जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को अपने भीतर की बुराइयों और अहंकार को त्यागने की प्रेरणा भी देता है। महाना के अनुसार, ज्ञान होने के बावजूद यदि व्यक्ति विनम्रता और सही आचरण का पालन नहीं करता, तो उसका ज्ञान भी उसे सही दिशा नहीं दे सकता। इसलिए जीवन में ज्ञान के साथ अच्छे संस्कार और विनम्रता का होना भी जरूरी है।

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शस्त्र अन्याय के लिए नहीं, न्याय की रक्षा के लिए

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि शस्त्र पूजन का भाव शीलता, विनम्रता, सेवा और साहस से जुड़ा हुआ है। शस्त्रों का उपयोग अन्याय करने के लिए नहीं, बल्कि न्याय की रक्षा के लिए होना चाहिए। यह परंपरा लोगों को अपनी शक्ति का इस्तेमाल जिम्मेदारी और सही उद्देश्य के लिए करने की सीख देती है।

उन्होंने विजयादशमी के पर्व को अहंकार त्यागने, विनम्रता अपनाने और न्याय के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देने वाला बताया। कानपुर में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से शास्त्र और शस्त्र की परंपरा के साथ भारतीय संस्कृति के मूल्यों को भी रेखांकित किया गया। दशहरे का यह संदेश समाज में साहस, सेवा और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

Location :  Kanpur

Published :  20 October 2026, 3:53 PM IST

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