रामपुर जेल में बंद आज़म खान और उनके बेटे से मुलाकात को लेकर नया विवाद सामने आया है। तंजीन फातिमा ने आरोप लगाया कि परमिशन के बावजूद बेटे के दोस्त को मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने जेल प्रशासन पर पारदर्शिता की कमी और खराब सुविधाओं के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

तंजीन फातिमा ने लगाया आरोप (Img: Google)
Rampur: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म इन दिनों रामपुर जेल में दो पैन कार्ड मामले में सजा काट रहे हैं। इसी बीच ईद के बाद परिवार की मुलाकात के दौरान एक नया विवाद सामने आया है, जिसने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, आज़म खान से मिलने उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा, बड़े बेटे अदीब आज़म और अब्दुल्ला के दोस्त अनवार जेल पहुंचे थे। प्रशासन ने तंजीन फातिमा और उनके बेटे को मुलाकात की अनुमति दे दी, लेकिन अनवार को अंदर जाने से रोक दिया गया। इस फैसले को लेकर अब आज़म परिवार ने नाराजगी जाहिर की है।
तंजीन फातिमा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अनवार का नाम उन 9 लोगों की सूची में शामिल था, जिन्हें पहले ही पुलिस और एलआईयू द्वारा सत्यापित किया जा चुका था। इसके बावजूद उन्हें मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई।
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उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सभी औपचारिकताएं पूरी थीं, तो आखिर अनवार को क्यों रोका गया?
मुलाकात के बाद तंजीन फातिमा ने जेल के अंदर की परिस्थितियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज़म खान की तबीयत ठीक नहीं रहती और उन्हें पीठ दर्द की समस्या है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लेटने के लिए तख्त तक उपलब्ध नहीं कराया गया है और जिस बैरक में रखा गया है, वहां मच्छरों की भरमार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि शायद जेल प्रशासन बाहरी लोगों को अंदर आने से रोककर वास्तविक स्थिति छिपाना चाहता है।
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इस मामले में तंजीन फातिमा ने यूसुफ मलिक पर दर्ज एफआईआर को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि मलिक ने केवल ईरान में मारी गई छात्राओं के प्रति संवेदना व्यक्त की थी, जिसमें कोई आपत्तिजनक बात नहीं थी।
उनके अनुसार, आज़म खान का नाम इसलिए लिया गया क्योंकि वे शिक्षा संस्थानों से जुड़े हैं और स्वाभाविक रूप से इस तरह की घटनाओं पर दुख व्यक्त करना सामान्य है।
तंजीन फातिमा ने स्पष्ट किया कि वह इस पूरे मामले को लेकर उच्च अधिकारियों, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक लिखित शिकायत पहुंचाएंगी। उन्होंने कहा कि जो व्यवहार उनके परिवार के साथ हो रहा है, वह किसी भी राजनीतिक व्यक्ति के साथ हो सकता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।