राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अब तक का सबसे बड़ा सवाल, SIT की रिपोर्ट में दोषी होने के बाद भी बैंक कर्मियों पर क्यों मेहरबान है पुलिस?

राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT की रिपोर्ट के बाद भी बैंक कर्मियों पर पुलिस की नरमी ने खड़े किए गंभीर सवाल। जानिए टिन्नू यादव और मुख्य आरोपियों के कबूलनामे के बीच क्यों केवल पूछताछ तक ही सीमित रह गई है पुलिस की कार्रवाई।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 12 July 2026, 10:20 AM IST

Ayodhya: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बैंक कर्मियों की संदिग्ध भूमिका को स्पष्ट रूप से उजागर किए जाने के बावजूद, पुलिस ने अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की है।

न तो किसी बैंक कर्मी को इस मामले में अब तक आरोपी बनाया गया है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस द्वारा इन मुख्य जिम्मेदार अधिकारियों पर बरती जा रही यह नरमी अब चर्चा का विषय बन गई है, जबकि इस मामले में कई अन्य आरोपियों को पहले ही सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

SIT की रिपोर्ट में था जिम्मेदारी का जिक्र

चढ़ावा चोरी के इस मामले में अब तक चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव और छह अन्य गणना कर्मियों को जेल भेजा जा चुका है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट में यह साफ कहा गया था कि दान राशि की गिनती के लिए राम मंदिर ट्रस्ट और संबंधित बैंक के बीच बकायदा एक एमओयू (MOU) हुआ था।

इस समझौते के तहत दान राशि की सुरक्षा और उचित निगरानी की पूरी जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की थी। ड्यूटी पर तैनात रहने वाले दो बैंक कर्मियों के नाम भी सामने आए थे, जिन्हें कुछ समय पहले उनके पदों से हटा दिया गया था। इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई सिर्फ पूछताछ तक ही सीमित रही, जबकि बैंक अपने स्तर पर केवल विभागीय जांच की औपचारिकता पूरी कर रहा है।

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40 दिनों में 70 बार चोरी का सनसनीखेज खेल

इस पूरे मामले में जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और पुलिस विवेचना से पता चला है कि शातिर चोरों के इस गिरोह ने महज 40 दिनों के भीतर 70 बार मंदिर के चढ़ावे पर हाथ साफ किया। इस गिरोह ने चोरी की मुख्य जिम्मेदारी अविनाश शुक्ला नाम के शख्स को सौंप रखी थी, जो अकेले ही लगभग 50 बार कैमरे में रकम पार करते हुए कैद हुआ है।

रिमांड के दौरान पूछताछ में अविनाश ने कबूल किया कि वह बेहद शातिर तरीके से रकम लेकर निकल जाता था, जबकि गिरोह के बाकी सदस्य जैसे मनीष और रमाशंकर उसे कवर करने के लिए चारों तरफ खड़े हो जाते थे।

मास्टरमाइंड अनुकल्प और लवकुश रचते थे पूरी साजिश

जाँच में सामने आया है कि इस पूरी चोरी का ताना-बाना अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा नाम के आरोपी बुनते थे। वे ही तय करते थे कि किस समय और कैसे दान की रकम को पार करना है। वहीं, टिन्नू यादव और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव का काम इस पूरी चोरी की निगरानी करना था, ताकि कोई दूसरा शख्स इन चोरों को देख न सके।

आरोपी अमूमन हर दिन दो बार और कभी-कभी तो दिन में तीन बार तक चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। यह पूरा खेल तब से चल रहा था, जब से इन सभी आरोपियों को मंदिर में काम पर लगाया गया था।

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जांच का दायरा बढ़ा, कई और संदिग्ध रडार पर

पुलिस इस मामले में लगातार जांच आगे बढ़ा रही है। मुख्य आरोपी अविनाश, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश को रिमांड पर लेकर की गई पूछताछ में 8 से 10 नए नाम सामने आए हैं। पुलिस ने इनमें से पांच संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है, जिनमें कुछ अन्य गणनाकर्मी भी शामिल हैं।

इनमें से एक-दो लोगों पर पुलिस का शक और गहरा गया है। हालांकि एसआईटी की विस्तृत और अंतिम जांच अब अपने आखिरी चरण में है, लेकिन पुलिस की कानूनी विवेचना अभी लंबी चलने की उम्मीद है।

Location :  Ayodhya

Published :  12 July 2026, 10:20 AM IST