रायबरेली में पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर सिंह ने राजन जी महाराज की राम कथा में वीवीआईपी व्यवस्था, महंगे टिकट और निजी फर्म लाभ के आरोप लगाते हुए सरकारी धन के दुरुपयोग की चिंता जताई।

रायबरेली में राम कथा पर विवाद
Raebareli: धार्मिक कथावाचक राजन जी महाराज के गत दिवस हुए राम कथा कार्यक्रम को लेकर सरेनी विधानसभा से पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर सिंह ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि कथाकार ने कार्यक्रम में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जो विवादास्पद हैं, जैसे “राजा जी खजनवा दे दा”, “रानी जी गहनवा दे” और “राम चरित प्राइवेट लिमिटेड फर्म”।
आज आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह राम कथा सरकारी कार्यक्रम था, जिसमें जनता का लाखों करोड़ों रुपए खर्च हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम में सरकार का प्रचार प्रसार नहीं हुआ, बल्कि आयोजकों ने स्वयं को मालामाल किया।
पूर्व विधायक ने कहा कि कथाकार ने कथा के दौरान वीवीआईपी व्यवस्था की, महंगे टिकट लगाए और बड़े मंत्री, नेता व विधायक शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण राम कथा नहीं थी, बल्कि भजन-कीर्तन का आयोजन था, जिसमें भक्ति की बजाय लोगों का मनोरंजन किया गया।
रायबरेली में रहस्यमयी मौतें! एक दिन में मिली 2 लाश, जांच में जुटी पुलिस
सुरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि “रामचरितमानस प्राइवेट लिमिटेड फर्म नहीं है, लेकिन राजन जी महाराज प्राइवेट फर्म हो सकते हैं। वह व्यवसायिक हो सकते हैं।” उन्होंने रायबरेली से “राम बरेली” नाम बदलने की मांग को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की साजिश बताया।
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि राम कथा कार्यक्रम में सरकार ने जो जिम्मेदारी दी थी, उसका लाभ आयोजकों ने उठाया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में कथा करने वाले कथाकार सरकारी पैसे का दुरुपयोग कर रहे हैं।
रायबरेली में सनसनीखेज मामला: चार महीने बाद कब्र से निकाला गया शव, दिल दहला देने वाला मामला
सुरेंद्र बहादुर सिंह ने रायबरेली के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रायबरेली बैसवारा का हिस्सा है, अंग्रेजों ने इसे उन्नाव और रायबरेली में बांटा। उन्होंने रायबरेली के स्थानीय और सांस्कृतिक गौरव की रक्षा का आह्वान किया।