
माघ मेला प्रयागराज (img Source: google)
Prayagraj: प्रयागराज का माघ मेला हर वर्ष श्रद्धा, साधना और सनातन परंपराओं का जीवंत स्वरूप बनकर सामने आता है। संगम तट पर गूंजते मंत्र, कल्पवासियों की साधना और साधु-संतों की कठोर तपस्याएं इस मेले को विशेष बनाती हैं। माघ मेला 2026 में भी ऐसे ही एक साधु अपनी अनोखी तपस्या के कारण श्रद्धालुओं और मीडिया के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
बिहार के सीतामढ़ी से आए 26 वर्षीय साधु शंकरपुरी इन दिनों माघ मेला क्षेत्र में चर्चा में हैं। उनकी पहचान उनकी बेहद कठिन तपस्या है। शंकरपुरी पिछले सात वर्षों से न तो बैठे हैं और न ही लेटे हैं। वे हर कार्य खड़े-खड़े ही करते हैं, चाहे वह पूजा हो, ध्यान हो, भोजन हो या विश्राम। मेला क्षेत्र में लोग उन्हें दूर से देखते हैं और उनकी साधना को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं।
शंकरपुरी का कहना है कि उनका आध्यात्मिक जुड़ाव नैमिषारण्य से है, जिसे ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है। मान्यता है कि नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने तपस्या की थी। वहीं से उन्हें खड़े रहकर साधना करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया कि मात्र छह वर्ष की उम्र में उन्होंने संन्यास का मार्ग अपना लिया था और सात साल पहले उन्होंने खड़े रहकर तपस्या करने का संकल्प लिया, जिसे वे आज तक निभा रहे हैं।
जब उनसे पूछा जाता है कि वे आराम कैसे करते हैं, तो शंकरपुरी बताते हैं कि लकड़ी के सहारे सिर टिकाकर खड़े-खड़े ही नींद पूरी कर लेते हैं। उनके अनुसार यह तपस्या केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और ईश्वर से जुड़ाव का माध्यम है।
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माघ मेला हमेशा से ही ऐसी कठिन साधनाओं के लिए जाना जाता रहा है। देशभर से साधु-संत और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, ताकि वे संगम में पुण्य स्नान कर सकें और संतों की तपस्या से प्रेरणा ले सकें। इस वर्ष माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 तक चलेगा। अनुमान है कि इस दौरान करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचेंगे।
हिंदू धर्म में माघ मेले का विशेष धार्मिक महत्व है। पुराणों और शास्त्रों में माघ मास को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इस महीने संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि हजारों श्रद्धालु कल्पवास करते हैं, यानी संगम तट पर एक महीने तक सादा जीवन, संयम और भक्ति में समय बिताते हैं।
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शंकरपुरी जैसे साधु माघ मेले की उसी आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत करते हैं। उनकी तपस्या यह संदेश देती है कि आस्था, संकल्प और साधना के सामने शारीरिक कष्ट भी छोटा पड़ जाता है। माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को जागृत करने वाला अनुभव बन जाता है।
Location : Prayagraj
Published : 10 January 2026, 11:24 AM IST