
अमेठी में नवजात देखभाल का नया मॉडल तैयार (IMG: Dynamite News)
Amethi: अमेठी में नवजात शिशुओं की देखभाल को लेकर एक नई पहल शुरू की गई है। अब समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले नवजातों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर तक पहुंचकर उनकी देखभाल और स्वास्थ्य की निगरानी करेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने सोमवार को ‘सक्षम केएमसी’ यानी गृह आधारित कंगारू मातृ देखभाल कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस पहल का मकसद नवजात देखभाल को अस्पताल की चारदीवारी से निकालकर परिवार और समुदाय तक पहुंचाना है।
इस कार्यक्रम के तहत समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले नवजातों को घर पर ही जरूरी देखभाल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसमें कंगारू मदर केयर यानी मां द्वारा नवजात को त्वचा से त्वचा का संपर्क देना, नियमित और उचित स्तनपान, बच्चे के स्वास्थ्य की निगरानी और परिवार को जरूरी सलाह देना शामिल है। स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल से बच्चे की छुट्टी होने के बाद परिवार के संपर्क में रहेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पताल में शुरू हुई नवजात की देखभाल घर पहुंचने के बाद भी लगातार जारी रहे।
राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों के लिए लगातार देखभाल बेहद जरूरी है। कार्यक्रम के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर यानी सीएचओ, एएनएम, संगिनी और आशा कार्यकर्ताओं की संयुक्त टीम परिवार के साथ समन्वय बनाकर काम करेगी। इन स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी सिर्फ बच्चे की निगरानी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि परिवार को नवजात की सही देखभाल के बारे में समझाना भी इसका अहम हिस्सा होगा।
‘सक्षम केएमसी’ कार्यक्रम का शुरुआती क्रियान्वयन अमेठी के तिलोई ब्लॉक के छह आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में किया गया है। यहां कार्यक्रम के शुरुआती अनुभव उत्साहजनक बताए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान पाकरगांव उपकेंद्र की आशा, एएनएम, संगिनी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और स्थानीय माताओं ने अपने अनुभव साझा किए। उनके मुताबिक त्वचा से त्वचा संपर्क, नियमित स्तनपान और लगातार निगरानी से नवजातों के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिला है।
यह पहल सिर्फ जिला स्तर की योजना नहीं है। कार्यक्रम को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर, जिला स्वास्थ्य समिति और कम्युनिटी इम्पॉवरमेंट लैब के संयुक्त प्रयास और तकनीकी सहयोग से संचालित किया जा रहा है। आईसीएमआर द्वारा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में मान्यता प्राप्त कम्युनिटी इम्पॉवरमेंट लैब स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कार्यक्रम के प्रभावी संचालन में सहयोग कर रही है। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने और समुदाय आधारित नवजात देखभाल को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता भी दी जा रही है।
कार्यक्रम का खास फोकस उन बच्चों पर है जिनका जन्म समय से पहले हुआ है या जिनका वजन जन्म के समय कम है। ऐसे नवजातों को सामान्य बच्चों की तुलना में अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। आईसीएमआर के साइंटिफिक एडवाइजरी बोर्ड और गवर्निंग काउंसिल के सदस्य डॉ. विश्वजीत कुमार ने कहा कि इस पहल में ऐसे नवजातों की समय रहते पहचान, कंगारू मदर केयर की जल्द शुरुआत, परिवार को लगातार मार्गदर्शन और नियमित फॉलोअप पर जोर दिया जा रहा है।
Location : Amethi
Published : 24 August 2026, 8:36 PM IST